महासमुन्द
महासमुंद, 2 जून। महासमुंद जिले में खेत बचाओ अभियान कार्यकम चलाया जा रहा है ।
कृषि विभाग द्वारा 1 से 30 जून तक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता और दीर्घकालिक उत्पादन लगातार घट रहा है भारत सरकार द्वारा नवंबर 2024 से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन चलाया जा रहा है जो पारंपरिक ज्ञान पर आधारित एक टिकाऊ एवं आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प है इसके साथ ही देश को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मर्भिर बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय खांद्य सुरक्षा मिशन तिलहन भी लागू किया गया है ।
किसानों के मध्य रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर प्रभाव तथा प्राकृतिक खेती के महत्व पर वैज्ञानिक परिचर्चा एवं जैविक उत्पाद संबधी जानकारी प्रदान की गई ।
किसानों के मध्य कृषक चौपाल लगाकर हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयों को विस्तार से समझाया गया।
यूरिया डीएपी के विकल्प के रूप में एनपी के एसएसपी जैव उर्वरक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जैविक खाद, सूक्ष्म पोषक तत्व के उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा अनुरूप उर्वरक हेतु व्यापक जन-जागरूकता कार्यकम ग्राम स्तर एवं विकासखण्ड स्तर पर किया जा रहा हैं। खेत बचाओ अभियान के तहत ग्राम धौराभांठा ख बागबाहरा जिला महासमुंद में आज किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें कृषकों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया गया। हरी खाद एवेस्ट डिकंपोजर, नील हरित शैवाल का खेती में उपयोग का संक्षेप में जानकारी प्रदान किया गया पराली न जलाने का संदेश देते हुए पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए वेस्ट डिकंपोजर का प्रयोग एवं उपस्थित कृषकों को वेस्ट डिकंपोजर बनाने की विधि करके दिखाया गया सिखाया गया एवं कृषकों को हरी खाद के लिए मूंग एवं ढैंचा बीज का वितरण किया गया।


