महासमुन्द

पारा 44 पार, रात में भी चल रही गर्म हवा
22-May-2026 4:38 PM
 पारा 44 पार, रात में भी चल रही गर्म हवा

चिलचिलाती धूप और लू ने कई साल का रिकॉर्ड तोड़ा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,22 मई।  गुरुवार को महासमुंद का अधिकतम तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया और आज 22 मई को भी अधितम तापमान 44 डिग्री से अधिक बताई जा रही है। सुबह से भीषण गर्मी के चलते लोग दिन भर घरों में रहने को मजबूर हैं। घरों-दफ्तरों में पंखे, कूलर और एसी का उपयोग लगातार बढ़ गया है। महासमुंद जिले में दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म हैं। रात में भी न्यूनतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।

जिला मुख्यालय सहित अंचल के तमाम अस्पतालों में लू के मरीज पहुंच रहे हैं। आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। अब तो रात मे भी गर्म हवा के थपेड़ों से लोग जूझ रहे हैं। चिलचिलाती धूप और लू ने पिछले कई साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब तो दोपहर होते-होते स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि व्यस्त सडक़ों और मुख्य बाजारों में अघोषित कफ्र्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता है। मौसम विभाग ने इस जानलेवा गर्मी को देखते हुए रेड अलर्ट जैसी स्थिति बताई है और लोगों को आने वाले कुछ दिनों तक बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

गुरुवार की दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच सौर विकिरण इतना तेज था कि पारा 43 से बढक़र 44 प्लस हो गया। आज भी यही हाल है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए सडक़ों पर निकलना बहुत मुश्किल हो चुका है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में अचानक उल्टी, दस्त, तेज बुखार, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन शरीर में पानी की कमी की शिकायतें आ रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों के लिए सख्त हिदायत जारी की है धूप से बचें। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी न हो तो घर या ऑफिस से बाहर बिल्कुल न निकले। प्यास न भी लगे तो भी लगातार पानी पीते रहे। सादे पानी के अलावा नींबू पानी, ओआरएस का घोल, नारियल पानी और म_े का अधिक से अधिक सेवन करें। बाहर निकलते समय हमेशा सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें।

डॉक्टरों के मुताबिक इस तीव्रता की धूप में मात्र 15-20 मिनट सीधे संपर्क में रहने पर भी स्किन बर्न और सनस्ट्रोक का खतरा रहता है। आमतौर पर सूरज ढलने के बाद लोगों को ठंडी हवाओं और राहत की उम्मीद होती है लेकिन वर्तमान स्थिति  कष्टदायक है। रात होने के बावजूद तापमान में कोई खास गिरावट नहीं देखी जा रही है और तापमान 38 से 42 डिग्री के बीच है।

लगातार बढ़ती गर्मी और उमस का सीधा असर जिले की विद्युत व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। राहत पाने के लिए लोग बड़े पैमाने पर कूलर और एयर कंडीशनर चला रहे हैं। जिससे बिजली की खपत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। विद्युत विभाग के अनुसार जिले में सामान्य दिनों में बिजली की औसत मांग 150 से 200 मेगावाट के बीच रहती है। लेकिन मई के पहले सप्ताह में सिंचाई पंपों के संचालन के दौरान यह खपत 450 से 500 मेगावाट तक पहुंच गई थी। वर्तमान में खेतों में सिंचाई पंप बंद हो चुके हैं, लेकिन केवल घरेलू उपयोग के कारण भी बिजली की मांग 250 से 300 मेगावाट तक बनी हुई है।

विशेष रूप से दोपहर और रात के समय एसी और हाई-स्पीड कूलरों के सामूहिक उपयोग से ग्रिड पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। ओवरलोडिंग के कारण कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर गर्म होकर खराब हो रहे हैं। इससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। हालांकि विद्युत विभाग लगातार सुधार कार्य में जुटा हुआ है। जहां ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं, वहां तत्काल मरम्मत और बदलाव का कार्य किया जा रहा है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी नौतपा के नौ दिन बाकी हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में गर्मी और बिजली संकट दोनों के और बढऩे की आशंका बनी हुई है। अत्यधिक गर्मी और ओवरलोडिंग का सबसे बुरा असर मोहल्लों में लगे स्थानीय ट्रांसफार्मरों पर पड़ रहा है। तापमान के 40 डिग्री पार करते ही वितरण लाइनों में फाल्ट आने शुरू हो जाते हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल पूरे सीजन में करीब 90 ट्रांसफार्मर जले थे। इस साल अभी तक करीब 50 का आंकड़ा पार हो गया है। विशेषकर सरायपाली, बसना और महासमुंद शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रांसफार्मर ओवरहीटिंग के कारण लगातार जवाब दे रहे हैं।

जानकारी अनुसार जिले में वर्तमान में लगभग 2 लाख 85 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब ग्रामीण इलाकों में भी सुख-सुविधा के साधन बढ़े हैं। तापमान बढ़ते ही इन सभी कनेक्शनों पर एक साथ लोड आ जाता है। महासमुंद सर्कल के ईई वाय के मनहर का कहना है कि निर्धारित क्षमता से अधिक लोड पडऩे की वजह से ऑयल गर्म हो जाता है और शॉर्ट सर्किट के कारण ट्रांसफार्मर धधक उठता है। विभाग लगातार व्यवस्था में लगा हुआ है।


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