महासमुन्द

आरएसएस का 15 दिनी प्रांतीय घोष वर्ग शुरू
13-May-2026 4:20 PM
आरएसएस का 15 दिनी प्रांतीय घोष वर्ग शुरू

शंख-बांसुरी वाद्य कला सीख रहे 110 शिक्षार्थी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,13मई। भलेसर रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर इन दिनों अनुशासन, राष्ट्रसेवा और पारंपरिक वाद्य संगीत के अद्भुत संगम का गवाह बन रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत का प्रांतीय घोष वर्ग 10 मई से शुरू किया गया है, जो 24 मई तक चलेगा। इसमें पूरे छग प्रांत के विभित्र जिलों से आए स्वयंसेवक अपनी स्वर-साधना और वादन कौशल को धार दे रहे हैं।

वर्ग के अधिकारियों ने बताया कि संघ की कार्यपद्धति में घोष बैंड का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल अनुशासन का प्रतीक है, बल्कि सामूहिक शक्ति और लयबद्धता का संचार भी करता है। इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों को उनकी अभिरुचि के अनुसार विभिन्न वाद्य यंत्रों में निपुण बनाना है। शिविर में विशेष रूप से भारतीय परंपरा से जुड़े वाद्यों बंशी बांसुरी,ड्रम और शंख के वादन का सघन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षकों द्वारा हर स्वर और ताल की बारीकी सिखाई जा रही है ताकि जब ये घोष वादक पथ संचलन में उतरें, तो उनकी धुनें समाज में राष्ट्रभक्ति का उत्साह भर दें। यह घोष वर्ग अपनी जड़ों, अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक संगीत को संजोने का एक सफल प्रवास है। यह शिविर न केवल स्वयंसेवकों को शारीरिक और मानसिक रूप से सुटुढ़ बना रहा है, बल्कि उन्हें एक बेहतर और अनुशासित नागरिक के रूप में भी तैयार कर रहा है।

शिविर में कुल 170 स्वयंसेवक अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। निमें 110 शिक्षार्थी हैं जो विभिन्न जिलों से नए कौशल सीखने आए हैं। 20 शिक्षक संगीत और घोष वादन के विशेषज्ञ हैं जो सुबह से देर शाम तक अभ्यास सत्रों का संचालन कर रहे हैं। 40 व्यवस्थापक हैं।

हर सुबह प्रशिक्षण की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि यह वर्ग केवल वाद्य यंत्र बजाना सीखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास की एक पाठशाला है। यहां शिक्षार्थियों को समय प्रबंधन,कठोर अनुशासन, व्यवस्था कौशल और निस्वार्थ राष्ट्रसेवा के संस्कार दिए जा रहे हैं। यह शिविर 24 मई तक चलेगा। अंतिम दिनों में स्वयंसेवकों द्वारा सीखे गए कौशल का सार्वजनिक प्रकटीकरण किया जाएगा। समापन के अवसर पर घोष प्रदर्शन और पथ संचलन की योजना है, जिसमें जिले के प्रबुद्ध नागरिक भी साक्षी बनेंगे।

 


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