महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,19 फरवरी। पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने पीएम आवास के नाम शासन-प्रशासन द्वारा लूटी जा रही वाहवाही को जमीनी हकीकत के विपरीत बताते हुए भाजपा सरकार के कृत्य को जनविरोधी कहा है।
श्री चंद्राकर ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि महासमुंद जिले को पीएम आवास पूर्णता में द्वितीय स्थान मिलने और राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बावजूद, जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आ रही है। अधूरे मकानों को कई जगहों पर रोजगार सहायकों और सचिवों ने बिना छत या प्लास्टर के ऑनलाइन पोर्टल पर पूर्ण बताकर सरकारी राशि निकाल ली है। जबकि लोग आज भी कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा लाभार्थियों ने सरपंच और सचिवों पर पैसे मांगने के आरोप लगाए हैं। पात्र हितग्राही अपना मकान पाने के लिए भटक रहे हैं। जबकि अनेक जगहों पर पहले से बने मकानों को पीएम आवास बताकर राशि निकाली जा रही है। जिससे पात्र हितग्राही इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं।पूर्व संसदीय सचिव ने बताया कि इस योजना में सबसे ज्यादा गड़बड़ी जिला महासमुंद में ही हुआ है। 2 हितग्राहियों के प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा निकालकर एक ही आवास बनाये गये हैं। योजना के मापदंड का पालन कहीं भी नहीं हो रहा है, कई ग्रामों के ग्राम सभाओं में भी आम जनता द्वारा आपत्ति दर्ज करायी गई है।
पहली किश्त हितग्राहियों को देकर दूसरी किश्त देना सरकार भूल जा रही है। जिससे हितग्राहियों द्वारा पुराने मकान को तोडक़र केवल दीवाल ही खड़ी किये हैं। स्वयं हितग्राही खुले आसमान में सोने को मजबूर हैं। इसी कारण बहुतायत पीएम आवास अधूरे पड़े हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद जिले में प्रधानमंत्री आवास क्रियान्वयन एजेंसी के अधिकारीध् कर्मचारियों द्वारा बिना सत्यापन के पात्र हितग्राही बताया जा रहा है। जबकि जिन्हें पात्र बताया गया है। उनके पहले से पक्के मकान बने हुये हैं। इसी तरह हितग्राहियों के पूर्व से निर्मित मकान को पीएम आवास कागजों में दर्शाकर पीएम आवास की राशि ले रहे हैं। कितनी ऐसी शिकायतें लगातार मिल रहीं हैं, कि जो वास्तव में कच्चे मकान या बेघर हंै, उन्हें पात्र न बताकर 10.15 हजार रुपए आर्थिक लाभ लेकर पक्के मकान निर्मित एवं पूर्व से निर्मित मकान को पीएम आवास मकान दर्शाकर राशि का आहरण किया जा रहा है।
इस तरह के भ्रष्टाचार के कारण पात्र हितग्राही पीएम आवास योजना से वंचित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, लेकिन उन्हीं के अधिकारी कर्मचारी खुलेआम गरीबों के लिये बनी योजना प्रधानमंत्री आवास में खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं। श्री चंद्राकर कहा प्रधानमंत्री आवास प्लस का सर्वे किया गया है, जिसका सत्यापन यदि सही तरीके से नहीं किया गया तो पूर्व से बने पक्के मकान धारकों का भी नाम शामिल किया गया है। इसका पुन: ग्रामों में जाकर सही तरीके से सत्यापन किया जाना आवासहीन व्यक्तियों के हित में होगा। अन्यथा पूर्व की भांति पहले से बने पक्के मकान के मालिक ही पुन: पीएम आवास प्लस योजना के हितग्राही बन जायेंगे। पीएम आवास प्लस योजना से इन्हीं का अतिरिक्त मकान निर्मित किया जायेगा। पात्र एवं आवासहीन व्यक्ति पीएम आवास योजना से वंचित हो जायेंगे।


