महासमुन्द

मनरेगा में बदलाव का विरोध:कलेक्टोरेट में घुसने की कोशिश
19-Feb-2026 3:15 PM
मनरेगा में बदलाव का विरोध:कलेक्टोरेट में घुसने की कोशिश

 एसडीएम को ज्ञापन देकर लौटे कांग्रेसी, कहा-यह योजना मजदूरों के लिए संजीवनी थी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,19 फरवरी। मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने तथा इसमें किए बदलावों के विरोध में जिले भर से आए कांग्रेसजनों ने बुधवार की शाम प्रदर्शन करते हुए रैली निकाली और कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए पुलिस की किलेबंदी तोडक़र कलेक्टोरेट में घुसने की कोशिश की। जोश से भरे कांग्रेसजन पहले तो पुलिस का घेरा व बेरीकेडिंग तोडक़र भीतर घुस गए लेकिन दूसरे घेरे से आगे निकलने के लिए उन्हें पुलिस बल से जोर आजमाइश करनी पड़ी। यह संघर्ष 10 मिनट चला। बाद में एसडीएम को ज्ञापन देकर कांग्रेसजन लौटे।

एआईसीसी के संयुक्त सचिव और छग प्रभारी विजय जांगिड़, खरिसया विधायक व मनरेगा बचाओ संग्राम के राज्य प्रभारी उमेश पटेल तथा जिला कांग्रेसाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव, विधायक चातुरी नंद के नेतृत्व में विशाल रैली कलेक्टोरेट जाने निकली। पुलिस ने पहले ही जिले भर से बल मंगाकर कलेक्टोरेट को घेर रखा था। बीटीआई मार्ग पर कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार के अलावा बेरिकेडिंग कर 3 जगह रास्ता बंद कर रखा था। उन्हें रोकने के लिए 250 के आसपास पुलिस बल तैनात था। एसपी प्रभात कुमार अवकाश पर थे। मौके पर एडिशनल एसपी प्रतिभा पांडे ने कमान सम्हाल रखी थी। इस दौरान माइक पर जिला कांग्रेसाध्यक्ष खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण जीवन का आधार बना रहा। पहले ग्रामीणों की मांग पर काम मंजूर होत था।

नए बदलावों के तहत किस गांव में कब और कितना देना है, यह नेता व अधिकारी तय करेंगे। इतना ही नहीं अब मजदूरों को 8 घंटे काम करना होगा। विकास काम के बजाये उन्हें सडक़, भवन आदि कामों में लगाया जाएगा। श्री यादव ने कहा कि मनरेगा कानून बनाकर कांग्रेस ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्रामस्थापना के सपने की ओर एक ठोस कदम उठाया था। कोरोना के दौरान गांवों में यह योजना मजदूरों के लिए संजीवनी बनी थी। मोदी सरकार इसे खत्म कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ग्रामीणों के राष्ट्रपिता का नाम हटा दिया गया। साथ ही पहले 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी और मात्र 10 प्रतिशत राज्य सरकार। इसलिए रोजगार मिलने की 100 फीसदी गारंटी हुआ करती थी। अब 60अनुपात 40 के अनुपात से केंद्र ने अपना हिस्सा कम कर राज्यों पर 40 प्रतिशत भार डाल दिया है। राज्य सरकारें पहले ही वित्तीय संकट और कजों से जूझ रही है। जिसके चलते वह 40 ुप्रतिशत भुगतान नहीं कर सकेगी।

फलस्वरूपए ग्रामीणों को काम नहीं मिल पाएगा। इस योजना में महात्मा गांधी का नाम और प्रावधान यथावत रखने की मांग की गई है। इसके बाद कांग्रेसियों ने बेरिकेड्स को धकेल कर हटाने के लिए जोर लगाना शुरू किया। पीछे खड़े सौ से अधिक पुलिस जवानों ने मजबूती से बेरिकेड्स को पकड़ रखा था। इस जोर आजमाइश से कुछ बेरिकेड्स गिर जाने से रास्ता खुल गया और कांग्रेसजन भागकर दूसरे लेयर तक जा पहुंचे। लेकिन वहां और ज्यादा मजबूत व्यवस्था थी। 10 मिनट की खींचतान के बाद 10-12 प्रमुख नेताओं को जगह बनाकर तीसरी लेयर तक पहुंचाया गया। जहां उन्होंने राज्यपाल के नाम लिखे ज्ञापन एसडीएम अक्षा गुप्ता को सौंपा।

     

  इसके पूर्व कांग्रेस भवन में छग प्रभारी विजय जांगिड़ ने कांग्रेसजनों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटा दिया है और मजदूरों को मिलने वाला काम का अधिकार भी छीन लिया है। मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। विधायक उमेश पटेल ने कहा कि नए बदलावों के तहत 60-40 का अनुपात रखा गया है। राज्य को 40 प्रतिशत राशि देना होगा। जबकि राज्य के पास फंड ही नहीं है। ऐसे में मनरेगा के तहत काम मिलना बेहद मुश्किल होगा।

       सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने मनरेगा में बदलाव के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कांग्रेसजनों को पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, आलोक चंद्राकर,डा. रश्मि चंद्राकर, केशव चंद्राकर, राशि महिलांग, लक्ष्मण पटेल, राजू यादव, गणेश शर्मा, फिरोज मेमन आदि ने भी संबोधित किया।

नगर पालिका अध्यक्ष निखिलकांत साहू, मोहित ध्रुव, ग्रामीण अध्यक्ष खिलावन साहूए भूपेंद्र मूंगू ठाकुरए अंकित बागबाहराए दिव्येश चंद्राकर आदि मंचासीन थे।

       संचालन टोमन सिंह कागजी और आभार प्रदर्शन शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला ने किया। इस अवसर पर हरदेव ढिल्लो, जसबीर ढिल्लो, कृष्णा चंद्राकर, विक्की मुश्ताक खान, तबरेज खान, राजू साहू, सोमेश दवे, हर्षित चंद्राकर, ढेलू निषाद, अमर चंद्राकर, आवेज खान, देवेश शर्मा, दशोदा ध्रुव, हीरा बंजारे,मानिक साहू, गौरव चंद्राकर, शहबाज राजवानी, अरूण चंद्राकर, गिरधर आवड़े, ताम्रध्वज बघेल, मन्ता यादव, मिथुन अमीर, मयंक शर्मा, आरिन चंद्राकर आदि उपस्थित थे।


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