महासमुन्द

धान खरीदी के अंतिम दिनों में व्यवस्थागत बदलाव, उठाव पर रोक
24-Jan-2026 3:27 PM
धान खरीदी के अंतिम दिनों में व्यवस्थागत बदलाव, उठाव पर रोक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 24 जनवरी। धान खरीदी के अंतिम चरण में शासन ने राइस मिलरों को दिए जाने वाले धान के उठाव पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। यह निर्णय प्रदेश के विभिन्न जिलों में राइस मिलों में की गई जांच के बाद लिया गया है। प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान कुछ मिलों में उपलब्ध स्टॉक, अभिलेखों में दर्ज मात्रा से कम पाया गया।

प्रशासन ने आशंका जताई है कि धान के उठाव के बाद उसे बिचौलियों के माध्यम से दोबारा किसानों के नाम पर खरीदी केंद्रों में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 17 जनवरी से ऑनलाइन गेट पास और डीओ जारी करने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

मार्कफेड के इस आदेश के बाद सहकारी समितियों और खरीदी केंद्रों पर धान के भंडारण की स्थिति बनी हुई है। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि उठाव बंद होने से केंद्रों में धान जमा हो रहा है। जिले में अब तक 8.09 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसमें से 2.97 लाख मीट्रिक टन का उठाव हुआ है। शेष धान केंद्रों में रखा हुआ है। पूर्व में खरीदी के साथ-साथ उठाव की व्यवस्था लागू थी। वर्तमान निर्देशों के अनुसार मिलरों को धान का उठाव खरीदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। समितियों का कहना है कि लंबे समय तक भंडारण से धान की गुणवत्ता और वजन पर प्रभाव पड़ सकता है।

शासन द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि उठाव शीघ्र प्रारंभ नहीं होता है, तो 23 जनवरी तक की गई धान खरीदी का नोडल अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। सत्यापन के दौरान पंचनामा, स्टैक रिकॉर्ड और फोटोग्राफी की जाएगी। नोडल अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन का रैंडम आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुन: सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही यह निर्देश दिए गए हैं कि 27 जनवरी से खरीदा जाने वाला धान अलग स्टैक में रखा जाएगा और इस धान का परिवहन नहीं किया जाएगा। भौतिक सत्यापन अवधि के बाद परिवहन केवल 23 जनवरी तक के सत्यापित स्टैक से ही किया जाएगा।

धान खरीदी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शासन ने एसओपी जारी कर भौतिक सत्यापन के लिए बिंदु तय किए हैं। इसके तहत उन किसानों के मामलों की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने अधिक मात्रा में धान बेचा है या जिनके रिकॉर्ड संदेह के दायरे में हैं। जांच में भूमि रकबा, उत्पादन क्षमता और उपलब्ध धान से संबंधित तथ्यों का मिलान किया जा रहा है।

जिला प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान कुछ मामलों में यह पाया गया है कि भूमि दस्तावेजों के आधार पर धान विक्रय में अनियमितता की संभावना है। इन मामलों की जांच जारी है। प्रशासन ने समिति प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि केवल पात्र किसानों से ही धान की खरीदी की जाए।

 


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