महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 5 फरवरी। पूर्व विधायक एवं चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ विमल चोपडा़ ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की संपत्तियों की गाइड लाइन में दर को 30 की बजाय 10 प्रतिशत बढ़ाकर 40 करने को छत्तीसगढ़ के किसानों एवं भूमि स्वामियों के साथ धोखा बताया है। इन दरों में कमी के कारण सरकार जिन भूमियों का अधिग्रहण करेगी उन किसानों एवं भूस्वामियों को मुआवजे में 160 प्रतिशत की कमी हो जाएगी लेकिन रजिस्ट्री शुल्क 4 से बढ़़ाकर 5 करने के कारण सरकार के खजाने में आम आदमी के जेब से ज्यादा पैसा जाएगा। किसानों को भूमि का मुआवजा चार गुणा देने का दम भरने वाली सरकार ने उसमे 160 प्रतिशत की कटौती कर अपने किसान विरोधी चरित्र को उजागर किया है । बाजार में जमीन के मूल्य के वृद्धी हो रही है और सरकार उसकी कीमत कम आंक रही है जो कि काल्पनिक है वास्तविक नहीं और ऐसा ढोंग सरकार अपने लाभ व मुआवजा कम बांटना पड़े इसके लिए कर रही है।
डॉ. चोपडा ने कहा कि महासमुंद में निर्माणधीन ओवरब्रिज का मुआवजा भाजपा शासन में प्रभावितों को 100 प्रतिशत दिया गयाा और लोग प्रसन्न थे, परन्तु कांग्रेस की सरकार आते ही इसमे 30 प्रतिशत की कटौती कर दी गयी जबकी वास्तव में इन स्थानो में भूमि की बाजार दर में वृद्धि हुयी है और अब उसमें 10 प्रतिशत ज्यादा कमी करते हुए बाजार दर से 40 प्रतिशत:कमी कर इसका मुआवजा महासमुंद के प्रभावितों को मिलेगा जो इनके साथ घोर अन्याय है। ऐसे भी कछुआ गति से कांग्रेस शासन में चल रहे ओवर ब्रिज के निर्माण को प्रभावितों के कारण और धीमा हो जाएगा।
भाजपा शासन में प्रभावितों को 100 प्रतिशत मुआवजे के साथ राशि राजस्व विभाग एवं सेतु निगम को दी गई परंतु कांग्रेस शासन की निष्क्रियता के कारण ओवर ब्रिज लटक रहा है और प्रभावितों के मुआवजे में अब 40 प्रतिशत की कमी करना धोखा है।


