महासमुन्द

खरीदी केंद्र में एक करोड़ से अधिक का धान गायब, प्रभारी गिरफ्तार
31-May-2026 4:17 PM
खरीदी केंद्र में एक करोड़ से अधिक का धान गायब,  प्रभारी गिरफ्तार

सत्यापन में 9 हजार कट्टा धान कम मिले

 ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 31 मई। महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र के धान उपार्जन केंद्रों में वित्तीय अनियमितताओं की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। इससे पहले ही बम्हनी धान खरीदी केंद्र में करोड़ों रुपए के धान घोटाले के खुलासे के बाद प्रभारी को जेल भेजा गया है। अब नरसैयापल्लम धान उपार्जन केंद्र में भी 1 करोड़ 12 लाख 92 हजार 420 रुपए के धान गबन का बड़ा मामला सामने आया है।  इसमें भी प्रभारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

विभागीय जानकारी अनुसार यहां सरकारी अभिलेखों में दर्ज हजारों क्विंटल धान भौतिक सत्यापन के दौरान गायब मिला है। जिसके बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा पिरदा के प्रबंधक उसत प्रधान की शिकायत पर बसना पुलिस ने केंद्र प्रभारी महेन्द्र प्रधान के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।

जानकारी के अनुसार उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं महासमुंद के निर्देश तथा कलेक्टर महासमुंद के आदेश पर गठित विशेष जांच दल ने 16 मई को नरसैयापल्लम धान उपार्जन केंद्र का आकस्मिक भौतिक सत्यापन किया था। केंद्र में पुराने खाली बारदानों की संख्या अभिलेखों की तुलना में 1 हजार 468 अधिक पाई गई। ये बारदाने अव्यवस्थित स्थिति में रखे हुए थे।

विशेष जांच दल ने पूरे मामले के लिए केंद्र प्रभारी महेन्द्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया है। प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि धान खरीदी नीति 2025-26 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए शासन एवं सहकारी संस्था को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर बसना पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 316-5 के तहत आपराधिक विश्वासघात एवं गबन का अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में ले लिया है।

जांच दल में पिथौरा तहसीलदार मोहित कुमार अमिला, खाद्य निरीक्षक दिव्यांशु देवांगन, पिरदा शाखा प्रबंधक उसत कुमार प्रधान तथा संग्रहण केंद्र के कर्मचारी शामिल थे। जांच प्रतिवेदन के अनुसार केंद्र में कुल 34 हजार 364 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज थी, जिसमें से 29 हजार 838.08 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका था। अभिलेखों के मुताबिक केंद्र में 4 हजार 525.92 क्विंटल धान शेष होना चाहिए था। इसमें 25.60 क्विंटल सरना धान तथा 4 हजार 500.32 क्विंटल मोटा धान दर्ज था।

 

जब जांच दल ने मौके पर रखे धान का भौतिक सत्यापन किया तो सरना धान की मात्रा रिकॉर्ड के अनुरूप मिली। लेकिन मोटा धान मात्र 857.60 क्विंटल ही पाया गया। इस प्रकार 3 हजार 642.72 क्विंटल मोटा धान अर्थात 9 हजार 107 कट्टे धान मौके से गायब मिले। रिकॉर्ड और वास्तविक स भंडारण में इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद जांच दल ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना।

जांच में गायब पाए गए धान की कुल कीमत 1 करोड़ 12 लाख 92 हजार 420 रुपए आंकी गई है, इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत 86 लाख 29 हजार 603 रुपए 68 पैसे तथा कृषक उन्नति योजना की 26 लाख 62 हजार 828 रुपए 32 पैसे 92 हजार 432 रुपये के धान गबन की बड़ी राशि शामिल है। धान घोटाले के आरोप में केंद्र प्रभारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।


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