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मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा सदस्यों का वॉकआउट
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 5 मार्च। प्रदेश में गोबर खरीदी को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में काफी देर बहस हुई। भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने पूछा कि गोबर खरीदी के लिए किस मद से भुगतान हुआ है? कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने बताया कि गोबर खरीदी के लिए गोधन न्याय योजना के मद से भुगतान हुआ है। शिवरतन शर्मा और अन्य भाजपा सदस्यों ने मंत्री पर गलत जवाब देने का आरोप लगाया, और कहा कि तेरहवें और चौदहवें वित्त आयोग के मद की राशि से पंचायतों को गोबर खरीदी का भुगतान करने के लिए कहा गया है। इस पूरे मामले पर कृषि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल में भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने मामला उठाया। इसके जवाब में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने बताया कि गोधन न्याय योजना शुरू होने से अब तक 40 लाख 35 हजार क्विंटल गोबर खरीद की गई है। इस योजना के मद में कुल 77 करोड़ 52 लाख से अधिक का भुगतान हुआ है। यह भी बताया कि सभी जिले में 70 हजार क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार हुआ है, और कुल मिलाकर 40 हजार क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय विभिन्न संस्थाओं को किया गया।
भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा के सवाल के जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि ग्राम सभा की सहमति के बाद प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर गौठान समिति का गठन किया गया है। भाजपा सदस्य ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के विपरीत जाकर गौठान समितियों का गठन किया गया। श्री शर्मा ने जानना चाहा कि गोबर खरीदी के लिए किस मद से भुगतान हुआ है? इसके जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि गोधन न्याय योजना के मद से भुगतान हुआ है। योजना में पिछली बार ग्रामीण विकास के मद की राशि से भुगतान किया गया था। इस बार आबकारी पर सेस लगाया गया है, और इसका भुगतान हो रहा है।
भाजपा सदस्य ने आरोप लगाया कि पंचायतों की मूलभूत राशि से गोबर खरीदी के लिए दबाव बनाया गया है। तेरहवें-चौदहवें वित्त आयोग के पैसे से गोबर खरीदी की गई है। कृषि मंत्री ने कहा कि नीति में इसका प्रावधान नहीं है। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर और बृजमोहन अग्रवाल ने भी इसको लेकर सवाल पूछे। मंत्री से जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया।


