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राज्य सरकार ने दी हाईकोर्ट को जानकारी
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 17 जनवरी। बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट में नाइट लैंडिंग सुविधा को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। नाइट लैंडिंग के लिए जरूरी डीवीओआर मशीन और रनवे लाइटिंग सिस्टम की कमीशनिंग पूरी कर ली गई है। अब केवल नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) का निरीक्षण और लाइसेंस जारी होने की औपचारिकता शेष रह गई है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में शुक्रवार को एयरपोर्ट और हवाई सुविधा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति राधा कृष्ण अग्रवाल के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से कहा कि डीजीसीए द्वारा निरीक्षण की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कराई जाए, ताकि नाइट लैंडिंग का लाइसेंस शीघ्र मिल सके।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए 290 एकड़ भूमि के बदले 50 करोड़ 64 लाख रुपये जमा कर दिए गए हैं। अब केवल जमीन वापस लेने की औपचारिकता बाकी है।
इस पर खंडपीठ ने संतोष जताते हुए कहा कि इससे बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि टर्मिनल भवन के बाहर प्रस्तावित कैंटीन, टॉयलेट और यात्रियों के विश्रामगृह का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है।
अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने फोटो पेश कर बताया कि लगभग दो महीने बीतने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, जिससे यात्रियों को बाहर पेड़ के नीचे बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है।
कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर नया शपथ पत्र दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं में देरी स्वीकार्य नहीं है।
खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी के लिए तय की है। तब तक डीजीसीए निरीक्षण और यात्री सुविधाओं से जुड़े कामों की प्रगति पर कोर्ट की नजर रहेगी।


