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बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण में 5 साल की देरी पर हाईकोर्ट ने मांगा डीजी से जवाब
17-Jan-2026 1:04 PM
बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण में 5 साल की देरी पर हाईकोर्ट ने मांगा डीजी से जवाब

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 17 जनवरी। शहर में लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाओं के बावजूद नए फायर स्टेशन का निर्माण पांच साल बाद भी शुरू नहीं होने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गंभीर नाराज़गी जताई है। शुक्रवार को स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने होमगार्ड, सिविल डिफेंस, आपात सेवा और एसडीआरएफ के महानिदेशक से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि करीब साढ़े सात लाख की आबादी वाले शहर में अत्याधुनिक फायर स्टेशन का न होना गंभीर चूक है।
वर्तमान में कुडुदंड पानी टंकी के पास अस्थायी रूप से संचालित फायर स्टेशन शहर की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।

अदालत को बताया गया कि फायर ब्रिगेड के पास पुराने वाहन, कर्मचारियों की कमी और पर्याप्त जल भंडारण नहीं है। ऐसे में किसी बड़े हादसे के दौरान प्रभावी राहत और बचाव कार्य करना मुश्किल हो जाता है।

कोर्ट ने मोपका सब-स्टेशन में लगी आग का भी उल्लेख किया, जिसमें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था और आग बुझाने में घंटों लग गए थे। इसे शहर की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ी के रूप में देखा गया।

लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तावित नए फायर स्टेशन के लिए 1.58 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। लेकिन पहली निविदा के बाद जरूरी चेकलिस्ट समय पर अधीक्षण अभियंता कार्यालय को नहीं भेजे जाने से पूरी प्रक्रिया रद्द हो गई। इसे अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी का नतीजा बताया गया।

प्रस्तावित स्थल पर कचरा डंपिंग और दलदली जमीन होने के कारण निर्माण चुनौतीपूर्ण बताया गया है। नए प्लान के तहत राफ्ट फाउंडेशन तकनीक से निर्माण का प्रस्ताव है, जिसमें पहले 8 फीट और फिर 7 फीट अतिरिक्त खुदाई की जाएगी।

फायर स्टेशन को 2020 में मंजूरी मिली थी, लेकिन ढाई साल केवल जमीन चयन में निकल गए। सकरी रोड, सर्किट हाउस और कोनी जैसे स्थानों पर विचार के बाद अंततः कुडुदंड को चुना गया। दलदली जमीन के कारण संशोधित अनुमान भेजा गया, जिसे मंजूर होने में फिर दो साल लग गए। इसके बावजूद नियमों के हवाले से टेंडर रद्द कर दिया गया।


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