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छत्तीसगढ़ में भुखमरी और गरीबी अब भी सबसे बड़ी चुनौती
25-Feb-2021 7:30 PM
छत्तीसगढ़ में भुखमरी और गरीबी अब भी सबसे बड़ी चुनौती

   डाउन टू अर्थ मैग्जीन की सालाना रिपोर्ट- स्टेट्स ऑफ इंडियाज़ इनवायरमेंट   

रायपुर, 25 फरवरी। नया राज्य बने 20 साल होने के बाद भी गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिये छत्तीसगढ़ को अभी लम्बा वक्त लगने वाला है। औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, पर्यावरण सुधार के लिये अब तक किये गये कार्यों का आंकड़ा भी संतोषजनक बिल्कुल नहीं है। शिक्षा व स्वास्थ्य, भू अधिकार तथा न्यायिक संस्थाओं की स्थिति फिर भी ठीक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कृषकों, श्रमिकों व वनोपज संग्राहकों के लिये सरकार की नीतियों से विकास को गति मिलेगी।

पर्यावरण पत्रिका ‘डाउन टू अर्थ’ की ‘स्टेट्स ऑफ इंडियाज इनवायरमेंट’ नाम से प्रकाशित सालाना रिपोर्ट में दर्शाये गये आंकड़ों से यह बात सामने आई है।  

रिपोर्ट में 25 फरवरी को जारी की जा रही है, जिसमें अन्य राज्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की स्थिति भी दर्शाई गई हैं। सन् 2030 तक नीति आयोग ने देश व राज्यों के विकास के पैमाने तय किये हैं, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, साक्षरता जैसे बिन्दुओं पर 100 प्रतिशत सफलता हासिल करनी है। इस पर डाऊन टू अर्थ ने एक अध्ययन प्रस्तुत किया है। यह रिपोर्ट देश के 60 पर्यावरण तथा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की मदद से तैयार की गई है।

प्रस्तुत अध्ययन में छत्तीसगढ़ में गरीबी को 49 अंक, शून्य भूख (भुखमरी) को 27 अंक दिये गये हैं। स्वास्थ्य को 52 अंक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को 52 तथा लैंगिक समानता को 43 अंक मिले हैं।

स्वच्छता और साफ पानी के मामले में स्थिति जरूर अच्छी है। इसमें 92 अंक प्राप्त हुए हैं। सस्ते और स्वच्छ ऊर्जा के लिये भी 56 अंक मिले हैं। आर्थिक विकास को 67, उद्योग व आधारभूत ढांचा को केवल 38 अंक तो असमानता को घटाने के प्रयासों को 60 अंक दिये गये हैं। शहरों में समुदायों के स्थायीत्व को 49 अंक, खपत और उत्पादन को 58 अंक, जलवायु व पर्यावरण को बनाये रखने के प्रयासों को 29 अंक तथा भूमि के अधिकार को 97 अंक दिये गये हैं। न्यायिक व अन्य संस्थानों की मजबूती को भी 71 अंक दिये गये हैं। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ का एसजीडी स्कोर (प्रतिबद्ध विकास मूल्यांकन) 56 पर रखा गया है।

सन् 2020-21 की महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2020 में राज्य ने 58 साल के बाद रेगिस्तानी टिड्डी का हमला दर्ज किया। टिड्डियों ने कोरिया जिले से राज्य में प्रवेश किया, इससे फसलें प्रभावित हुईं।  माइनिंग को लेकर चर्चा की गई है कि फरवरी में, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हसदेव के जंगलों में ग्राम सभा की सहमति के बिना जंगलों में खनन परियोजनाओं को मंजूरी देने का आरोप लगाया, जो वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के विरुद्ध है। जुलाई महीने में राज्य ने कोयले के वाणिज्यिक खनन को इस वादे के साथ मंजूरी दे दी कि इससे 60 हजार लोगों के लिये नौकरी पैदा होगी।

मई माह में जलशक्ति मंत्रालय द्वारा सन् 2020-21 में छत्तीसगढ़ के लिये जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्वीकृत 445 करोड़ रुपये को महत्वपूर्ण योजना माना गया है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 तक 100 प्रतिशत घरों में नल-जल कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार कटघोरा से डोंगरगढ़ के लिये बिछाई जाने वाली 294.3 किलोमीटर ब्राड गेज विद्युतीकृत रेल लाइन से भी आने वाले वर्षों में प्रतिबद्ध एवं सतत् विकास को रफ्तार मिल सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ का जगदलपुर देश का पहला नगर निगम बन गया है, जहां शहरी क्षेत्र के लोगों को वन अधिकार प्रमाणपत्र प्रदान किए गए हैं। जगदलपुर देश उन कुछ शहरी क्षेत्रों में से है, जहां वन क्षेत्र हैं। अक्टूबर में राज्य ने उद्यमिता विकास, सॉफ्ट स्किल, आईटी और व्यवसाय विकास पर ध्यान देने के साथ जनजातियों के समग्र विकास को प्रदान करने के लिए टेक फॉर ट्राइबल्स, प्रोग्राम शुरू किया। वन धन केंद्रों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों का संचालन किया गया जिसके लाभार्थी ऑनलाइन व्याख्यान, गतिविधियां कर रहे हैं और धीरे-धीरे क्लास रूम, व्यावहारिक, ऑनसाइट यात्राओं और एक्सपोज़र विज़िट में आमने-सामने बातचीत का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।  

पर्यावरण से जुड़े कुछ अदालती मामलों का जिक्र भी इस रिपोर्ट में हुआ है, जैसे सीपत एनटीपीसी में प्रदूषण घटाने के लिये डि सल्फराइजेशन प्लांट लगाने के लिये सुप्रीम कोर्ट से अधिक मोहलत मिल गयी है। इसके अलावा तमनार, घरघोड़ा ब्लॉक में पावर प्लांट और कोल वाशरी में निरीक्षण कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये अतिरिक्त समय की मांग की है। विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान योजना योजना शुरू की। पारंपरिक कृषि विधियों को पुनर्जीवित करने और आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए रोका-छेका अभियान शुरू किया गया। शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना ने 12 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को लाभ पहुंचाया। वनवासियों की आत्मनिर्भरता के लिए इंदिरा वन योजना शुरू की गई है। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ कृषि उपज बाजार (संशोधन) विधेयक 2020 को एक उपलब्धि के रूप में दर्शाया गया है जिसके तहत कृषि उत्पादों के बाजारों को नियंत्रित किया गया है। धान व मक्का की खरीद के लिये स्पष्ट नीति बनाई गई है। नई श्रम नीति को भी छत्तीसगढ़ सरकार ने मंजूरी दी है। इनसे राज्य व राज्य के लोगों के विकास में मदद मिलेगी।


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