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बिलासा हवाई अड्डे के रनवे विस्तार के लिए सेना की 200 एकड़ जमीन सुरक्षित रखें
23-Feb-2021 6:27 PM
बिलासा हवाई अड्डे के रनवे विस्तार के लिए सेना की 200 एकड़ जमीन सुरक्षित रखें

हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने रक्षा मंत्री व सीएम को लिखा पत्र

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 23 फरवरी। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मांग की है कि बिलासा दाई हवाईअड्डे के समीप सेना की भूमि पर छावनी के निर्माण के पूर्व 200 एकड़ भूमि रनवे के विस्तार के लिए सुरक्षित रखा जाये।

समिति ने बताया कि सन् 2011 में सेना को ट्रेनिंग सेंटर और अन्य संस्थानों की स्थापना के लिए चकरभाठा में 1012 एकड़ रिक्त जमीन आबंटित की गई थी। सेना ने बिलासपुर हवाई अड्डे के पूर्व विकास, यहां तक कि एयरबस 321 जैसे बड़े विमानों के लिए रनवे के विस्तार की सहमति दी थी। इसलिये जिस दिशा में रनवे का विस्तार प्रस्तावित है, वह भूमि भी भारतीय सेना के लिये अधिग्रहित कर दी गई थी। विगत 10 वर्षों में सेना ने अपने ट्रेनिंग सेंटर प्रोजेक्ट को बिलासपुर में लाने के लिये कोई कदम नहीं उठाया और उक्त भूमि आज तक रिक्त पड़ी है। 

आगे बताया कि सेना द्वारा बिलासपुर एयरपोर्ट का विकास किया जाना था, परन्तु देरी को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने स्वयं एयरपोर्ट विकसित करने का निर्णय लिया। वर्तमान में बिलासपुर एयरपोर्ट को 3सी वीएफआर श्रेणी का लायसेंस हासिल है और शीघ्र ही 72-78 सीटर विमान यहां से संचालित होने वाले हैं। वर्तमान में बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे 1500 मीटर लम्बा है जिसे बड़े विमानों के उपयुक्त बनाने के लिये 3000 मीटर तक लम्बा करना आवश्यक है।  इसके लिए हवाई पट्टी की दक्षिण दिशा में लगभग 200 एकड़ भूमि की आवश्यकता पड़ेगी।

मुख्यमंत्री द्वारा रक्षा मंत्री को इस 1012 एकड़ भूमि पर सेना की छावनी बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, जो स्वागत योग्य है परन्तु छावनी निर्माण करने के पहले रनवे विस्तार के लिए आवश्यक 200 एकड़ भूमि को पृथक कर उसे हवाई अड्डा प्रशासन को सौंपा जाना आवश्यक है। इस 200 एकड़ भूमि के मिलने के पश्चात ही बिलासपुर का हवाई अड्डा 4सी श्रेणी का तैयार हो सकेगा, जहां बड़े विमान उतर सकेंगे।

समिति ने पत्र में कहा है कि सेना अपनी छावनी बनाती है, तब भी उसे अपने बड़े मालवाहक विमानों के संचालन के लिये बड़ा रनवे चाहिये।  इसलिए यह सेना के भी हित में है। सेना के पास 812 एकड़ भूमि शेष बचेगी। यदि छावनी के लिए इसके अतिरिक्त भी भूमि चाहिए, तो राज्य शासन पास में ही अतिरिक्त भूमि सेना को उपलब्ध करा सकता है।

यह उल्लेखनीय है कि रनवे का विस्तार वर्तमान में स्थापित रनवे के आगे ही हो सकता है, जबकि सेना अपनी छावनी की योजना में अभी कोई भी आवश्यक बदलाव कर सकती है।
समिति ने केन्द्रीय मंत्री व मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे उत्तर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहर बिलासपुर क्षेत्र के विकास से संबंधित इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक निर्णय लें। 


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