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-भवानी सिंह
जयपुर. राजस्थान में गहलोत सरकार के विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के ठीक छह महीने बाद सचिन पायलट के शक्ति प्रदर्शन ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी. सचिन पायलट ने जयपुर के कोट खावदा में रैली की. छह महीने बाद किसी मंच पर पायलट गुट फिर एक साथ नजर आया. सिर्फ पायलट गुट ही नहीं गहलोत गुट के दो विधायक प्रशांत बैरवा और विरेंद्र सिंह ने आज पायलट की रैली के मंच पर पायलट समर्थकों के साथ जाकर चौंकाया. पायलट गुट के 14 विधायक और गहलोत गुट के दो विधायक पायलट के मंच पर थे. कुल 16 विधायक रैली का नजारा ऐसा था कि सीधे-सीधे पायलट की सियासी और जमीनी
ताकत की नुमाइश दिखी.
रैली के मंच पर पश्चिम राजस्थान के दिग्गज जाट नेता हेमाराम चौधरी, भरतपुर के दिग्गज जाट नेता विश्वेंद्र सिंह, पूर्वी राजस्थान में कद्दावर मीणा नेता रमेश मीणा और मुरारी मीणा, मंच पर जाट-मीणा, दलित विधायकों की मौजूदगी से पायलट कैंप ने दिखाने की कोशिश की कि उनके पास किसी एक जाति विशेष का नहीं, सभी जातियों और सभी इलाकों का समर्थन है.
प्रशांत बैरवा पहले पायलट के ही साथ थे लेकिन विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव से कुछ वक्त पहले गहलोत खेमे में चले गए थे. आज फिर पायलट के मंच पर लौटे. इससे पायलट ने ये संदेश देने की कोशिश की कि पूर्वी राजस्थान में उनकी मदद के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं. बैरवा के विधानसभा क्षेत्र में गुर्जर मतदाता निर्णायक हैं. किसान रैली का आयोजन पायलट के करीबी चाकसू विधायक वेद प्रकाश सोंलकी ने किया.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को भी सोलंकी ने निमत्रण दिया. ये निमंत्रण महज औपचारिकता थी. दोनों जानते थे कि पायलट की रैली है, लिहाजा दूरी बनाए रखी. रैली में पायलट के साथ राहुल गांधी के भी कट आउट लगाए जिससे ठप्पा कांग्रेस की किसान रैली का ही रहे लेकिन पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने मंच से तंज कस ही दिया कि पायलट की मेहनत से कांग्रेस कहां से कहां पहुंची.
इस रैली से पायलट ने तीन संदेश देने की कोशिश की:
1. राहुल गांधी की रैलियों से अधिक भीड़ जुटाकर पार्टी हाई कमान को संदेश कि क्राउड पुलर राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट ही हैं, अशोक गहलोत नहीं. राहुल गांधी की रैलियो का आयोजन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविद सिह डोटासरा ने किया था.
2. पूर्वी राजस्थान में पायलट की ये तीसरी रैली थी, तीनों रैली में अच्छी खासी भीड़ थी. तीसरी में उम्मीद से ज्यादा. इससे ये दिखाने की कोशिश की गई कि गुर्जर-मीणा बाहुल्य इलाकों में सबसे लोकप्रिय चेहरा वही हैं. उनकी जमीन पर पकड़ मजबूत है.
3 अपने गुट के विधायकों को साथ लाकर गहलोत गुट के दो विधायको को मंच पर लाकर संदेश दे दिया कि राजस्थान में मैच एकतरफा नहीं है.
क्या चाहते हैं पायलट?
पायलट अभी ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे उन पर बगावत के आरोप लगे. पायलट अपने बेस क्षेत्र में ऐसी रैलियां करते रहेंगे जिससे पार्टी हाई कमान तक संदेश पहुचा सके कि काग्रेस का राजस्थान में वे भविष्य हैं. रैलियों की भीड़ से कांग्रेस के दूसरे नेताओं को यकीन दिलाने की कोशिश करेंगे कि वे ही अगला चेहरा है चाहे किसी को पसंद हो या न हों.


