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नेशनल कॉन्फ़्रेंस नेता फ़ारूक़ अब्दुल्ला मंगलवार को लोकसभा में अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने कृषि क़ानूनों पर मोदी सरकार की जमकर आलोचना की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकार पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया.
डीडीसी चुनाव नतीज़ों को पटलने की कोशिश
राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण देते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा, ‘’केंद्र शासित राज्य जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए ज़िला विकास परिषद के चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुए. दिसंबर में चुनाव पूरे हुए. लेकिन चुनाव अधिकारी इस पद के चुनाव में जनता के दिए गए फ़ैसले को किसी के इशारे पर बदलने की कोशिशों में जुटे हैं‘’
'’डीडीसी चुनाव उचित तरीक़े से कराए गए लेकिन अब ज़िला कलेक्टर और अधिकारी लोगों पर दबाव बना रहे हैं कि वह किसी अन्य चेयरपर्सन का चुनाव करें.‘’
गुपकर गठबंधन का हिस्सा रही नेशनल कॉन्फ्रेंस को इस चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं. अब्दुल्ला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र को ख़त्म करने की कोशिश कभी अच्छे नतीजे नहीं दे सकती.
उन्होंने कहा, ‘’जनादेश न छीनें. कई साल पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस से एक और जनादेश छीना गया और उस सरकार ने दो सालों में सत्ता खो दी, साथ ही लोगों में उसके ख़िलाफ़ बुरी भावना भी पैदा हुई.‘’
कृषि कानून ‘पत्थर पर लक़ीर नहीं’
फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने किसानों का समर्थन करते हुए कहा, ‘'कृषि क़ानून कोई धर्मग्रंथ की लाइन नहीं है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता. किसानों से बात करिए, ये वक़्त अपनी प्रतिष्ठा में तन कर खड़े होने का नहीं है.‘’
''जो आज किसानों के साथ हो रहा है ये सरकार का वही रवैया है जो पाँच अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनाया गया था. जब दिल्ली में बैठकर राज्य से अनुच्छेद 370 और 35A हटाया गया था.''
उन्होंने कहा, ‘’आप हमें विश्वास में ले सकते थे. हमारी पार्टी ने तिरंगे को बचाते हुए 1,500 लोगों को खो दिया और अब आप हमें पाकिस्तानी और चीनी एजेंट कह रहे हैं. मैं एक मुस्लिम हूँ और मैं एक भारतीय मुस्लिम हूँ,” आपने मुसलमानों को उनकी जगह दिखाने के लिए राज्य को दो भागों में तोड़ दिया.‘’
उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेताओं द्वारा देश के पूर्व नेताओं की आलोचना हमारे देश का चलन नहीं है
‘’मेरे पिता को पंडित नेहरू ने जेल में डलवाया लेकिन दोनों के बीच कटुता नहीं आई. जब वे मिले तो आपस में रोए. मेरी गुजारिश है कि आप किसानों से बात करें.‘’ (bbc.com)


