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दुनिया का सबसे महंगा पदार्थ एंटीमैटर सबसे ज्यादा रहस्यमयी भी है. कुछ सालों पहले नासा ने इसके एक ग्राम की कीमत 62.5 खरब डॉलर मानी थी, जो अब 90 खरब डॉलर हो चुकी है. अगर पूरी दुनिया चौबीसों घंटे लगातार एक साल तक काम करती रहे, तब इसका एक ग्राम खरीद सकती है. जानिए, इतने महंगे पदार्थ में आखिर ऐसा क्या है जो इसे खास बनाता है.
पहले समझते हैं, क्या है मैटर
एंटीमैटर को प्रतिद्रव्य भी कहा जा सकता है जो कि मैटर से विपरीत है. यानी इसमें मैटर से अलग गुण होते हैं. वैसे एंटीमैटर को समझने के लिए मैटर को समझना जरूरी है. मैटर के बारे में बहुत सी बातें अब भी भौतिक और रसायन विज्ञान की समझ से परे हैं, सिवाय इसके कि मैटर एटम से मिलकर बना है. और एक एटम इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बनता है.
किसमें कौन सी ताकत
एटम के बीच में होते हैं प्रोटॉन, जिनमें पॉजिटिव चार्ज होता है, न्यूट्रॉन में कोई चार्ज नहीं होता, जबकि इलेक्ट्रॉन में निगेटिव चार्ज होता है. इलेक्ट्रॉन के पास जितनी एनर्जी होती है, ऑर्बिट उतनी ही तेजी से बदलता है.
क्या है एंटीमैटर
एंटीमैटर के मामले में ये बात बदल जाती है. नासा के मुताबिक इसमें पाए जाने वाले एंटी-इलेक्ट्रॉन में पॉजिटिव चार्ज होता है, वहीं प्रोटॉन, जिसे एंटी-प्रोटॉन कहते हैं, उसमें निगेटिव चार्ज दिखता है. एंटीमैटर जिन चीजों से मिलकर बनता है, उन्हें antiparticles कहते हैं. बिग बैंग के बाद मैटर के साथ ही एंटीमैटर भी बराबर मात्रा में बना था. लेकिन फिर एंटीमैटर गायब हो गया.
अनुमान ही लगाए जा रहे हैं
इसकी वजह वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है. कुछ का कहना है कि मैटर एंटीमैटर की तुलना में कम रहा होगा जो कि धरती में बदलावों के दौरान गायब होता गया होगा. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सुदूर ब्रह्मांड में एंटीमैटर मिलने की संभावना है.
किसने की खोज
एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले ब्रिटिश भौतिकशास्त्री Paul Dirac ने बताया था. न्यू मैगजीन में उनकी थ्योरी छापी गई और Paul Dirac को न्यूटन के बाद सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना गया. हालांकि शुरुआत में मैटर के उलट काम करने वाले इस तत्व के बारे में बताने में वैज्ञानिक को संकोच हो रहा था इसलिए उन्होंने कहा कि हर मैटर की मिरर इमेज होती है, जो उसके विपरीत काम करती है. बाद में उन्हें एंटीमैटर पर काम के लिए नोबेल प्राइज मिला.
किस काम आ सकता है
जब मैटर एंटीमैटर के संपर्क में आता है तो दोनों ही एक-दूसरे को नष्ट कर देते हैं. इस दौरान भारी ऊर्जा निकलती है. इस बारे में जानने के बाद से वैज्ञानिक ये सोच रहे हैं कि इस तरीके से स्पेसक्राफ्ट बन सकेगा जो आसानी से अंतरिक्ष के रहस्यों तक पहुंच सकेगा. इसपर नासा ने साल 2010 में एक रिपोर्ट भी तैयार की, जो बताती है कि एंटीमैटर का इस्तेमाल स्पेसक्राफ्ट की दुनिया में कैसी क्रांति ला सकता है.
कम मात्रा में बन चुका है
एंटीमैटर को समझने के लिए वैज्ञानिक इसे बनाने की कोशिश कर रहे हैं और काफी थोड़ी मात्रा में इसे तैयार भी कर लिया गया है. हालांकि ये मात्रा अभी तक पता नहीं लग सकी है. वैज्ञानिकों का दावा है कि ultra high-speed collision के जरिए इसे तैयार किया जा सकता है. बता दें कि ये वो घटना है जिसमें कोई अत्यधिक तेजी से किसी स्थिर तत्व या मूविंग तत्व से टकराता है. इसमें काफी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है, जिसमें पार्टिकल्स के साथ एंटी-पार्टिकल्स भी होते हैं.
काफी खतरनाक है ये तत्व
मैटर के विपरीत काम करने वाला ये पदार्थ इतना खतरनाक है कि इसका छोटा सा हिस्सा भी पूरी दुनिया को किसी सबसे ताकतवर बम से भी तेजी से खत्म कर सकता है. यहां तक कि इसके खतरे पर एक बुक भी लिखी जा चुकी है. Angels and Demons नामक इस किताब में दिखाया गया है कि कैसे एक सीक्रेट सोसायटी वेटिकन सिटी को बम से मारने की कोशिश करती है. इसी डर की वजह से वैज्ञानिक एंटीमैटर की ज्यादा मात्रा बनाने से परहेज कर रहे हैं.
द हिंदू ग्रुप के निदेशक एन राम ने कहा है कि वर्तमान समय की तुलना आपातकाल से नहीं की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि "अभी ऐसी जगहें हैं जहाँ कोई भी कड़ी राय दे सकता है और दमनकारी शक्तियों से लड़ सकता है."
ये बात उन्होंने "पत्रकारिता और सिनेमा का अपराधीकरण" विषय पर आयोजित लाइव लॉ के वेबिनार में कही.
एन राम ने कहा कि क़ानून का असमान अमल करना और न्यायपालिका, एक से अधिक मौकों पर, मीडिया की आज़ादी की रक्षा करने में नाकाम रही है.
"हाल के दिनों में कई पत्रकारों की गिरफ़्तारी और उन पर आपराधिक मामलों को दर्ज करना, हमारे संविधान की अपूर्ण पंक्तियों को उजागर और चौड़ा कर चुका है."
वे कहते हैं, "क़ानून में कई फॉल्ट लाइनें हैं, जिसका सत्ता अपनी चालाकी से इस्तेमाल करता है और ये न्यायपालिका की विफलता पर्याप्त रूप से संरक्षित करने में विफल रहते हैं."
"एक समय था, जब विकासशील देशों के बीच मीडिया की आज़ादी के मामले में भारत एक महत्वपूर्ण स्थिति में था. लेकिन यह 40 साल पहले था. हम आपातकाल के काले अध्याय से बाहर आए थे."
उन्होंने कहा, "राजनीतिक वैज्ञानिक रॉबिन जैफ्री ने भारतीय भाषा प्रेस से जुड़े एक पुस्तक में इसे भारत में समाचार पत्र क्रांति कहा है. आज, अगर मुझे यह दावा करना हो कि हम 40 साल पहले जैसी महत्वपूर्ण स्थिति में हैं तो मुझ पर फ़ेक न्यूज़ फ़ैलाने का आरोप लगाया जाएगा."
एन राम ने कहा, "आज के समय को बढ़ाचढ़ा कर आपातकाल जैसा बताने के लोभ में नहीं पड़ना चाहिए. मैं यह नहीं कहूंगा कि यह आपातकाल की तरह है. यह एक ग़लती होगी. मैं आपातकाल में रह चुका हूँ, तब पूरी तरह से सेंसरशिप थी, पत्रकार हिरासत में लिए गए थे. जल्दबाज़ी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचें. अब भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ आप अपने सशक्त विचार को व्यक्त कर सकते हैं, सरकार के कामों की कड़ी निंदा कर सकते हैं, न्यायपालिका की, पुलिस की आलोचना कर सकते हैं."
इस दौरान उन्होंने स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की गिरफ़्तारी की बात उठाते हुए कहा कि "इससे प्रेस को मिली आज़ादी की कलई खुल गई है. लेकिन अब भी बहुत गुंजाइश हैं जहाँ हम मनमानी, दमनकारी और ऐसी कार्रवाइयों के ख़िलाफ़ लड़ सकते हैं."
इस दौरान एन राम ने कुछ टीवी चैनल के बारे में कहा कि "हमें उनकी निंदा करनी चाहिए. मैंने कुछ अंग्रेज़ी के चैनल देखे हैं और वे दुनिया के सबसे बेकार चैनलों में से हैं. जिस टीवी चैनल से भी ये 'हेट स्पीच' आया है यह एक बड़ी समस्या है. हमें इस पर कुछ करना चाहिए."
"केवल बोलने की आज़ादी पर हमला नहीं है"
इसी वेबिनार में वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि पत्रकारों पर जो हमले हो रहे हैं, सिनेमा के लोगों पर जिस तरह के हमले किए जा रहे हैं यह बिल्कुल ही अलग तरह का है. और जो फॉल्ट लाइन इसने बाहर किए हैं वो क़ानून सम्मत नहीं हैं.
''वैसे क़ानून को लागू करने की जो समस्या है वो दशकों से है. लेकिन अभी जो दिख रहा है वह कुछ अधिक भयावह है. यह केवल हमारे बोलने की आज़ादी के अधिकार पर हमला नहीं है बल्कि बोलने की आज़ादी की अहमियत पर हमला करने के लिए कहीं बड़ा नैरेटिव रचा गया है.''
सिब्बल ने कहा, "हम भले ही आपातकाल की स्थिति में नहीं पहुँचे हों, लेकिन निश्चित रूप से हम इसकी राह पर हैं. जो हम देख रहे हैं वो हमें गहरे स्तर पर सचेत करता है और हमें इसे यूं ही ख़ारिज नहीं करना चाहिए जैसे कि यह कुछ समय के लिए आई झपकी है, बल्कि इसे देखें कि ये क्या है."
इस वेबिनार में शामिल पटकथा लेखिका ज्योति कपूर ने कहा, "जब कोई एक सेलिब्रिटी मुद्दा उठाएगा तो उसे धमकियाँ दी जाएंगी तो वह वापस बैठ जाएगा. तो किसी मुद्दे पर यहाँ लोगों को एक साथ मिलकर आवाज़ उठानी चाहिए. लेकिन जब वक़्त आता है तो इस इंडस्ट्री से आवाज़ नहीं आती है जो कि मुझे लगता है कि उन्हें साथ आ कर बोलना चाहिए."
इस दौरान ज्योति कपूर ने कहा कि तांडव पर विवाद के बाद पटकथा लेखक असुरक्षित थे. (bbc.com)


