ताजा खबर

गांधी जयंती पर सोनिया ने गिनाई मोदी सरकार की गांधी की सोच से दूरी
02-Oct-2020 1:35 PM
गांधी जयंती पर सोनिया ने गिनाई मोदी सरकार की गांधी की सोच से दूरी

‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर।
गांधी जयंती के मौके पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लंबे वीडियो बयान में गांधी को याद करते हुए कई तरह के तथ्य और तर्क दिए कि आज की मोदी सरकार किस तरह गांधी की सोच के ठीक खिलाफ काम कर रही है।

उन्होंने कहा- आज किसानों, मज़दूरों और मेहनतकशों के सबसे बड़े हमदर्द, महात्मा गांधीजी की जयंती है। गांधीजी कहते थे कि भारत की आत्मा भारत के गांव, खेत और खलिहान में बसती है। आज ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, लाल बहादुर शास्त्रीजी की जयंती भी है।

उन्होंने कहा- लेकिन आज देश का किसान और खेत मजदूर कृषि विरोधी तीनों काले कानूनों के खिलाफ सडक़ों पर आंदोलन कर रहा है। अपना खून-पसीना देकर देश के लिए अनाज उगाने वाले अन्नदाता किसान को मोदी सरकार खून के आंसू रुला रही है। 

श्रीमती गांधी ने कहा- कोरोना महामारी के दौरान हम सबने सरकार से मांग की थी कि हर जरूरतमंद देशवासी को मुफ़्त में अनाज मिलना चाहिए। तो क्या हमारे किसान भाइयों के बगैर ये संभव था कि हम करोड़ों लोगों के लिए दो वक्त के भोजन का प्रबंध कर सकते थे!

इस अवसर पर उन्होंने कहा- आज देश के प्रधानमंत्री हमारे अन्नदाता किसानों पर घोर अन्याय कर रहे हैं। उनके साथ नाइंसाफी कर रहे हैं, जो किसानों के लिए कानून बनाए गए, उनके बारे में उनसे सलाह मशविरा तक नहीं किया गया। बात तक नहीं की गई, यही नहीं उनके हितों को नजरअंदाज करके सिर्फ चंद दोस्तों से बात करके किसान विरोधी तीन काले कानून बना दिए गए। 

श्रीमती गांधी ने कहा- जब संसद में भी कानून बनाते वक्त किसान की आवाज नहीं सुनी गई, तो वे अपनी बात शांतिपूर्वक रखने के लिए महात्मा गाँधीजी के रास्ते पर चलते हुए मजबूरी में सडक़ों पर आए। लोकतंत्र विरोधी, जन विरोधी सरकार द्वारा उनकी बात सुनना तो दूर, उन पर लाठियाँ बरसाईं गई।

उन्होंने कहा- भाइयों और बहनों, हमारे किसान और खेत मजदूर भाई-बहन आखिर चाहते क्या हैं, सिर्फ इन कानूनों में अपनी मेहनत की उपज का सही दाम चाहते हैं और ये उनका बुनियादी अधिकार है।  

श्रीमती गांधी ने कहा-आज जब अनाज मंडियां खत्म कर दी जाएँगी, जमाखोरों को अनाज जमा करने की खुली छूट दी जाएगी और किसान भाइयों की जमीनें खेती के लिए पूँजीपतियों को सौंप दी जाएँगी, तो करोड़ों छोटे किसानों की रक्षा कौन करेगा? 

उन्होंने कहा- किसानों के साथ ही खेत-मजदूरों और बटाईदारों का भविष्य जुड़ा है। अनाज मंडियों में काम करने वाले छोटे दुकानदारों और मंडी मजदूरों का क्या होगा? उनके अधिकारों की रक्षा कौन करेगा ? क्या मोदी सरकार ने इस बारे सोचा है?

श्रीमती गांधी ने कहा- कांग्रेस पार्टी ने हमेशा हर कानून जन सहमति से ही बनाया है। कानून बनाने से पहले लोगों के हितों को सबसे ऊपर रखा है, लोकतंत्र के मायने भी यही हैं कि देश के हर निर्णय में देशवासियों की सहमति हो। लेकिन क्या मोदी सरकार इसे मानती है? शायद मोदी सरकार को याद नहीं है की वो किसानों के हक के ‘भूमि के उचित मुआवजा कानून’ को आर्डिनेंस के माध्यम से भी बदल नहीं पाई थी। तीन काले कानूनों के खिलाफ भी कांग्रेस पार्टी संघर्ष करती रहेगी। आज हमारे कार्यकर्ता हर विधानसभा क्षेत्र और जिले में किसान और मजदूर के पक्ष में आंदोलन कर रहे हैं। मैं दावे के साथ कहना चाहती हूँ कि किसान और कांग्रेस का यह आंदोलन सफल होगा और किसान भाईयों की जीत होगी।


अन्य पोस्ट