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101 साल की उम्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 22 सितंबर। देश की आजादी के लिए लड़ाई लडऩे वाले राजनांदगांव शहर के वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी कन्हैयालाल अग्रवाल की वैश्विक महामारी कोरोना से जान चली गई। अपने जीवनकाल में मातृभूमि की आनबान और शान के लिए स्व. अग्रवाल ने सच्चे सिपाही के तौर पर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने हर मोर्चे पर अंग्रेजों को ललकारा। इसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
101 वर्ष के स्व. अग्रवाल ने मुल्क की आजादी के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। आजादी की लड़ाई में उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा। 20 अगस्त 1920 को जन्मे स्व. अग्रवाल ने अलग-अलग संगठनों के साथ मिलकर देश की स्वतंत्रता लड़ाई में बढ़-चढक़र भाग लिया। वह जंगल सत्याग्रह, मजदूर आंदोलन समेत आजादी के लिए हुए कई तरह के प्रदर्शन और आंदोलनों में शामिल रहे।
उनके पुत्र शरद अग्रवाल ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। स्वतंत्रता सेनानी स्व. अग्रवाल के पिछले साल ही स्थानीय राजनीतिक एवं गैरराजनीतिक संगठनों ने जन्मशताब्दी वर्ष मनाया था। इस दौरान शहर में बड़े आयोजन हुए थे। मिली जानकारी के मुताबिक 15 अगस्त 1948 को देश को आजादी मिलने के बाद उन्होंने शहर में भारती प्रेस नामक एक स्टेशनरी दुकान का शुभारंभ किया। यह स्टेशनरी दुकान आज भी संचालित है। उनके 4 पुत्र और तीन पुत्री है। उनके निधन से समूचे शहर में शोक की लहर है।


