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अग्निवेश नहीं रहे
11-Sep-2020 7:56 PM
अग्निवेश नहीं रहे

‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क
रायपुर, 11 सितंबर।
आर्य समाज के एक बड़े सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का आज निधन हो गया। यह जानकारी शाम को उन्हीं के फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई है। वे 81 वर्ष के थे और गंभीर हालत में अस्पताल में थे। 

आर्य समाज के प्रचारक स्वामी अग्निवेश का आज निधन हो गया है। वह लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। तबियत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरी साइंसेज (आईएलबीएस) में भर्ती कराया गया था। जहां मल्टी ऑर्गन फेल्योर के बाद शुक्रवार शाम उनका निधन हो गया।  

उनका अंतिम संस्कार दिल्ली से लगे गुरुग्राम में कल शाम 4 बजे किया जाएगा।

स्वामी अग्निवेश छत्तीसगढ़ के ही थे, और वे पूरे जीवन समाज सुधार के लिए, और बंधुआ मजदूरों की मुक्ति जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहे। वे बस्तर में भी मानवाधिकार के लिए लडऩे आते रहे, और वहां पुलिस की अगुवाई में उनके साथ भारी बदसलूकी भी की गई थी।

अग्निवेश पैदा तो आंध्र में हुए थे, लेकिन 4 बरस में ही पिता खोकर वे अपने नाना के घर में बड़े हुए जो कि छत्तीसगढ़ के सक्ती में दीवान थे। बाद में उन्होंने वकालत भी की थी। वे राजनीति में भी सक्रिय रहे।

21 सितंबर 1939 को जन्में स्वामी अग्निवेश ने कोलकाता में कानून और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद आर्य समाज में सन्यास ग्रहण किया।

आर्य समाज का काम करते-करते 1968 में उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाई- आर्य सभा। बाद में 1981 में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना उन्होंने दिल्ली में की. स्वामी अग्निवेश ने हरियाणा से चुनाव लड़ा और मंत्री भी बनें लेकिन मजदूरों पर लाठी चार्ज की एक घटना के बाद उन्होंने राजनीति से ही इस्तीफा दे दिया.

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संयोजक रहे स्वामी अग्निवेश इन दिनों माओवादियों से बातचीत के लिये चर्चा में हैं। माओवादियों और भारत सरकार के बीच बातचीत की कोशिश कर रहे सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संयोजक स्वामी अग्निवेश का मानना है कि भारत सरकार और माओवादी मजबूरी में शांति वार्ता कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोनों के सामने इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। माओवादी प्रवक्ता आज़ाद की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले स्वामी अग्निवेश का कहना है कि इस घटना ने शांति वार्ता को गहरा झटका पहुंचाया है।

स्वामी अग्निवेश पर नक्सलियों से सांठगांठ और हिंदू धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप है। जिसके कारण भारत में अनेकों अवसरों पर उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुये हैं।

जन लोकपाल विधेयक के लिए आंदोलन कर रही अन्ना हजारे की टीम में भी स्वामी अग्निवेश का अहम रोल है। जंतर-मंतर पर अन्ना के अनशन के दौरान अग्निवेश भी पूरे समय अन्ना के साथ रहे। हालांकि कई मुद्दों पर सिविल सोसायटी और अग्निवेश के बीच मदभेद भी पैदा हुए। असली मुद्दा प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में रखने या नहीं रखने को लेकर है। कहा जा रहा है कि अग्निवेश ने इस बारे में एक विवादास्पद बयान देकर सिविल सोसायटी को नाराज़ कर दिया है। अग्निवेश ने कहा कि अगर सरकार सिविल सोसायटी की बाक़ी मांगों को मान ले तो पीएम और न्यायपालिका के मुद्दे पर सिविल सोसायटी नरमी बरतने के लिए तैयार है। लेकिन सिविल सोसायटी ने इस बयान को बिलकुल ग़लत करार दिया। जुलाई 2018 में स्वामी अग्निवेश झारखंड गये जहां उन पर कथित भाजयुमो कार्यकर्ताओं नें मारा-पीटा। स्वामी जी ने प्रशासन पर भी सुरक्षा प्रदान न करने का आरोप लगाया। किन्तु पुलिस अधीक्षक ने स्वामी जी के कार्यक्रम किसी भी पूर्व सुचना से इंकार किया। 


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