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मुखबिरी के आरोप में दृष्टिहीन वृद्धा समेत गांव से 13 बेदखल
11-Sep-2020 4:21 PM
मुखबिरी के आरोप में दृष्टिहीन वृद्धा समेत गांव से 13 बेदखल

14 बरस में परिवार के 3 की नक्सल हत्या

अमन सिंह भदौरिया
दोरनापाल, 11 सितंबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)।
सुकमा जिले के पोलमपल्ली थाना अंतर्गत पालमडगु गांव से नक्सलियों की चेतावनी के बाद 2 परिवार के 13 लोग घर बेदखल कर दिए गए। इसके बाद आज सुबह मडक़म परिवार पोलमपल्ली अपने परिजनों के पास सर छुपाने की जगह तलाशते पहुंचा। इसकी जानकारी मिलते ही ‘छत्तीसगढ़’ की टीम मौके पर पहुंची। मौजूदा हालात के साथ पीडि़त परिवारों से बातचीत कर उनकी मांगों को जाना। जिसके बाद सूचना मिलते ही प्रशासन पीडि़तों तक पहुंचा। 

इस बारे में बस्तर के प्रभारी आईजी सुंदरराज से ‘छत्तीसगढ़’ के रायपुर कार्यालय से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि एक पुलिस सिपाही मडक़म मुंगा दोरनापाल में पदस्थ है। उससे संबंधित दो परिवार नक्सलियों की धमकी के बाद पालमडगु गांव छोडक़र पोलमपल्ली आ गए हैं जहां उनके लिए अस्थाई व्यवस्था की गई है। इसके बाद इन परिवारों का उनकी मर्जी की जगह पर पुनर्वास किया जाएगा और जरूरी मदद की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन परिवार के आए हुए लोगों में बच्चे भी शामिल हैं।

सुकमा कलेक्टर चंदन कुमार ने प्रशासन की टीम को पोलमपल्ली पीडि़त परिवारों से मिलने भेजा और उन्हें प्राथमिक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। जिसके बाद तहसीलदार समेत अमला पीडि़तों के बीच पहुंच उन्हें खाना खिलाने के साथ प्राथमिक राहत का आश्वासन भी दिया।

ज्ञात हो कि पीडि़त मडक़म परिवार कई सालों से नक्सलियों से पीडि़त रह चुका है। वर्ष 2006 से अब तक मडक़म परिवार के तीन सदस्यों की नक्सलियों ने मुखबिरी के शक में हत्या कर दी है और इस बार मडक़म परिवार को इस बात का हर्जाना भुगतना पड़ा कि उस परिवार का एक सदस्य सुरक्षा बल का जवान है। जिन तक मुखबिरी करने का आरोप इस परिवार पर लगा है और जन अदालत की एक बैठक में इस परिवार को गांव से बेदखल करने का फरमान नक्सलियों ने जारी कर दिया था। जिसके बाद शुक्रवार सुबह 6 बजे पीडि़त परिवार पोलमपल्ली पहुंचा। 

राशन सामग्री, गाय, बैल, भेड़ बकरी मुर्गी एक दृष्टिहीन वृद्धा समेत 13 लोग बारिश के बीच अपनी जमीन अपना मकान अपना खेत छोडक़र गांव से बेदखल किए गए मडक़म परिवार की आस सरकार और प्रशासन पर टिकी हुई है। ‘छत्तीसगढ़’ से बात करते वक्त पीडि़त परिवार ने घर जमीन और रोजगार की मांग सरकार व प्रशासन से की है ताकि रोजी-रोटी का जुगाड़ लगा सके।

बेदखल किये गए पीडि़त मडक़म परिवार के सदस्यों के नाम-
मडक़म पोदीया, मडक़म मासे, मडक़म कोसा, मडक़म सावित्री, मडक़म पाण्डु , मडक़म जोगी, मडक़म देवे (दृष्टिहीन), मडक़म धुर्वा, मडक़म हड़मे, मडक़म भीमा, मडक़म मुक्के, मडक़म हन्दा, मडक़म गंगी, मडक़म मोड़ा।

मडक़म परिवार बरसों से नक्सल प्रताडऩा का शिकार

गौरतलब है कि मडक़म परिवार पहली बार प्रताडऩा का शिकार नहीं हुआ है। वर्ष 2006 से लेकर बीते 2 माह तक इस परिवार के 3 सदस्यों की नक्सलियों ने हत्या कर की है। पीडि़त किसान मडक़म धुर्वा ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि  उसका छोटे भाई मडक़म जोगा सुकमा पढऩे जाता था और परीक्षा के दौरान नक्सलियों ने एक बैठक में बुलाकर पुलिस को सूचना देने के शक में 2006 में पालामडगु में हत्या की थी, वहीं दूसरे छोटे भाई मडक़म हिड़मा को पुलिस मुखबिरी के शक में गांव से लेकर गए थे जिसका अता पता नहीं चला। बीते दिनों परिजनों को नक्सलियों ने सूचना दी कि हिड़मा को जन अदालत ले जाया जा रहा था मगर रास्ते में वो भागने लगा जिसके बाद उसे तीर मारकर हत्या कर दी गई, मगर परिजनों को शव तक नहीं दिया गया और नक्सलियों द्वारा पहाडिय़ों में दफना दिया गया। इसके अलावा पीडि़त परिवार के अनुसार इसी परिवार के अन्य एक सदस्य की भी 1 साल पहले मुखबिरी के आरोप में हत्या कर दी गई थी। अब इस परिवार को यह कहकर गांव छोडऩे को कहा गया कि परिवार का एक सदस्य पुलिस में है, जिसे सूचना दी जाती है। गांव न खाली करने पर जान से मारने की धमकी के बार परिवार दहशत में पोलमपल्ली पहुंचा।

इस संबंध में एसडीओपी दोरनापाल अखिलेश कौशिक का कहना है कि यही नक्सलियों का कू्रर चेहरा है। एक तरफ नक्सली आदिवासियों के अधिकारों और जल जंगल जमीन को बचाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनको झूठे आरोपों हत्या और गांव से निकालते हैं। ग्रामीणों को बेदखल करने की सूचना उनके आने के बाद मिली प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई जिसके बाद तहसीलदार की टीम पीडि़तों तक पहुंची। उनको राहत पहुंचाने का काम जारी है। इससे पहले इस परिवार के सदस्यों की नक्सलियों ने हत्या भी की थी।


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