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‘छत्तीसगढ़’ एक्सक्लूजिव
रायपुर, 16 जून। भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। ईओडब्ल्यू-एसीबी प्रदेश के 11 जिलों में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में अनियमितताओं की शिकायतों की जांच कर रही है। इन जिलों में भी जल्द कार्रवाई की जा सकती है।
ईओडब्ल्यू-एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि जांच केवल रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जिलों में परियोजना के तहत दिए गए मुआवजों की भी जांच की जा रही है। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया कि रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिली थीं। इस मामले में जांच के बाद दर्जनभर से अधिक राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी इस मामले में चालान भी पेश कर चुकी है।
इधर, मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय है। ईडी रायपुर और दुर्ग के कुछ कारोबारियों के यहां छापेमारी कर दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक राजनांदगांव और दुर्ग जिलों में भी भूमि अधिग्रहण के एवज में अधिक मुआवजा दिए जाने की शिकायतों की जांच चल रही है। इसके अलावा रायगढ़ और कोरबा जिलों में भी भारतमाला परियोजना से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है।
रायगढ़ में करीब दो वर्ष पहले जिला प्रशासन ने मुआवजा वितरण में गड़बडिय़ां पकड़ी थीं और मामले में उच्चस्तरीय जांच की अनुशंसा की थी। उसी आधार पर अब आगे की जांच और कार्रवाई की जा रही है।
जांच एजेंसियां राजस्व अभिलेखों और मुआवजा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है तथा शिकायतों की गंभीरता के आधार पर नए मामलों में भी कार्रवाई की जाएगी।
अब तक 43 करोड़...
रायपुर-विशाखापटनम भारतमाला सडक़ परियोजना मामले में रायपुर, और धमतरी जिले के अधिग्रहित इलाकों में 57 खसरों में अनियमितता की शिकायत हुई थी। इनमें से 20 खसरों में गड़बड़ी की पुष्टि हुई, और 43 करोड़ रुपये अधिक मुआवजा देने की बात सामने आई है।
आरटीआई एक्टिविस्ट कृष्ण कुमार साहू ने दस्तावेजों के साथ 57 खसरों में गड़बड़ी की शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में कहा था गांधी, गुप्ता, गोलछा, राठी, और अग्रवाल जैसे बिल्डर ग्रुप द्वारा मुआवजा लेने के लिए किसान बनकर पटवारी, और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित कृषि भूमि को अवैध प्लाटिंग कर टुकड़ा-टुकड़ा में विभाजित कर वर्गफीट में अधिक मुआवजा देकर सरकारी कोष को क्षति पहुंचाया गया है। बाकी खसरों की जांच में गड़बड़ी की राशि काफी बढ़ सकती है।
हालांकि इस पूरे मामले में ईडी भी जांच कर रही है, और कई और पर आने वाले दिनों में कार्रवाई हो सकती है।


