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डिप्टी सीएम साव के हस्तक्षेप के बाद जारी हुआ कार्यादेश
प्रकाश नाग
केशकाल, 14 जून ('छत्तीसगढ़' संवाददाता )। लगभग 10 वर्षों से अटकी हुई बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट बायपास परियोजना को आखिरकार नई गति मिल गई है। लंबे समय से विवादों, तकनीकी खामियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी यह परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग जोन रायपुर द्वारा मेसर्स आलोक बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, दुर्ग को कार्यादेश जारी कर दिया गया है तथा निर्माण स्थल भी एजेंसी को सौंप दिया गया है।
यह परियोजना बस्तर संभाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके पूर्ण होने के बाद केशकाल घाट में लगने वाले जाम, दुर्घटनाओं और यातायात दबाव से बड़ी राहत मिलेगी।
साव के दौरे के बाद बढ़ी रफ्तार
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 5 जून को केशकाल पहुंचकर बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण किया था। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के साथ मौके पर समीक्षा कर लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने आवश्यक कार्यवाहियां तेज गति से पूर्ण करते हुए निर्माण एजेंसी को कार्यादेश जारी कर दिया।
श्री साव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि केशकाल बायपास बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा के समान है और इसका शीघ्र निर्माण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
308 करोड़ की मंजूरी, 268 करोड़ में हुआ टेंडर
केशकाल घाट बायपास परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 308 करोड़ रुपये की है। वहीं निर्माण कार्य के लिए जारी टेंडर की राशि लगभग 268 करोड़ रुपये रही है। विभागीय प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब निर्माण एजेंसी को कार्य प्रारंभ करने की अनुमति मिल गई है। यह बायपास 11.38 किलोमीटर लंबा चार लेन मार्ग होगा, जिसमें दो वृहद पुल और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे। परियोजना पूरी होने के बाद रायपुर से बस्तर आने-जाने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
गलत अलाइनमेंट ने रोक दिया था 10 साल तक विकास का पहिया
केशकाल बायपास परियोजना की सबसे बड़ी विडंबना इसका प्रारंभिक गलत अलाइनमेंट रहा। शुरुआती चरण में स्वीकृत रूट के अनुसार 8,159 पेड़ों की कटाई कर दी गई थी, लेकिन बाद में तकनीकी खामियां सामने आने के कारण उस अलाइनमेंट को बदलना पड़ा। इसके बाद नए सिरे से सर्वे, तकनीकी परीक्षण और स्वीकृतियों की प्रक्रिया शुरू हुई। संशोधित अलाइनमेंट के लिए भी 6,336 पेड़ों की कटाई की गई। वर्षों तक चली इस प्रक्रिया के कारण परियोजना पूरी तरह ठप हो गई और क्षेत्रवासियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?
परियोजना के पुन: शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है, लेकिन एक सवाल आज भी लोगों के मन में बना हुआ है। जब गलत अलाइनमेंट के कारण 8,159 पेड़ काट दिए गए, करोड़ों रुपये की परियोजना वर्षों तक अटकी रही और बाद में पूरा रूट बदलना पड़ा, तब इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन गलत निर्णय लेने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। पर्यावरण को हुए नुकसान और परियोजना में हुई देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
जांच रिपोर्ट या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं
बायपास निर्माण को लेकर शासन और प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन गलत अलाइनमेंट और हजारों पेड़ों की कटाई के मामले में अब तक कोई जांच रिपोर्ट या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है।



