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चूहे और कीड़े खा गए धान, दलील नहीं आई काम
06-Jun-2026 1:33 PM
चूहे और कीड़े खा गए धान, दलील नहीं आई काम

हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार
सोसायटी प्रबंधक को राहत नहीं, 23 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता का आरोप
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 6 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 690.70 क्विंटल धान गायब होने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग करने वाले एक सोसायटी प्रबंधक की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों को प्रारंभिक स्तर पर निरस्त करने की शक्ति का उपयोग अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए और इस मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

यह मामला दुर्ग जिले की पाटन तहसील स्थित कुम्हली सेवा सहकारी समिति मर्यादित का है। याचिकाकर्ता अतुल वर्मा वहां सोसायटी प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। मामले के अनुसार, समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान को निर्धारित समझौते के तहत 31 मार्च 2026 तक मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा उठाया जाना था। हालांकि, समय सीमा बीत जाने के बाद भी धान लंबे समय तक खरीदी केंद्र में ही पड़ा रहा। इस दौरान कई बार धान उठाव के लिए अनुरोध भी किए गए, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

बाद में किए गए सत्यापन और जांच के दौरान भंडारित धान में 690.70 क्विंटल की कमी पाई गई। जांच अधिकारियों ने इस कमी के लिए सोसायटी प्रबंधक को जिम्मेदार माना।

एफआईआर को चुनौती देते हुए अतुल वर्मा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि धान की मात्रा में कमी उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई। उन्होंने कहा कि मौसम के प्रभाव, प्राकृतिक क्षरण, चूहों और कीटों द्वारा नुकसान तथा बारदानों के खराब होने से धान कम हुआ। इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।

जांच में यह आरोप लगाया गया कि गायब हुए धान की कीमत 23 लाख 54 हजार 815 रुपये है। इस वित्तीय अनियमितता के आधार पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई, जिसके बाद दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक लिमिटेड के शाखा प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर रद्द करने की शक्ति असाधारण प्रकृति की है और इसका प्रयोग केवल दुर्लभ परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि मामले में जांच और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए एफआईआर को इस स्तर पर समाप्त नहीं किया जा सकता।

 


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