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जांजगीर-चांपा के याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत, संरचना तोड़ने और बेदखली पर लगाई रोक
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 6 जून। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले के अतिक्रमण प्रकरण में प्रशासन को निर्देश दिया है कि राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश शिवरीनारायण तहसील के ग्राम मिसदा निवासी रामप्रसाद राही द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।
याचिकाकर्ता ने 27 मई 2026 को जारी उस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत नायब तहसीलदार, शिवरीनारायण द्वारा जारी किया गया था। याचिका में कहा गया कि प्रशासनिक कार्रवाई के चलते उसे बेदखल किए जाने और उसके निर्माण को ध्वस्त किए जाने की आशंका है। राही ने बताया कि उन्होंने संबंधित आदेश के खिलाफ 1 जून 2026 को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दायर की है। इसके साथ ही अंतरिम स्थगन (स्टे) के लिए भी आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि, स्थगन आवेदन पर अब तक सुनवाई नहीं हो सकी थी। इस बीच स्थानीय राजस्व अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने से याचिकाकर्ता ने तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला राजस्व मंडल के समक्ष विचाराधीन है और स्थगन आवेदन पर सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार, शिवरीनारायण को निर्देश दिया कि राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी प्रकार की बेदखली, अतिक्रमण हटाने या संरचना ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई न की जाए।
साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया कि वह पुनरीक्षण याचिका और स्थगन आवेदन की सुनवाई में पूरा सहयोग करे, ताकि मामले का शीघ्र निराकरण हो सके।


