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सब कुछ नियमानुसार, कोई विवाद नहीं-चेयरमैन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 6 जून। श्रीरामचंद्र स्वामी दूधधारी मठ ट्रस्ट की एक बेशकीमती संपत्ति को लीज़ पर दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रस्ट की संपत्ति को कथित तौर पर नियमों के विपरीत अपने ही बेटे से जुड़ी संस्था को सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए अलग-अलग स्तरों पर शिकायत की गई है, और मामले की जांच की मांग उठी है।
शिकायत में कहा गया कि खनिज भवन के पीछे स्थित ट्रस्ट की लगभग 70 कमरों वाली इमारत, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है, को सुंदर फाउंडेशन के निदेशक मनोज गोयल को मात्र एक लाख रुपये प्रतिमाह के किराए अथवा लाइसेंस शुल्क पर उपलब्ध कराया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह राशि बाजार दर की तुलना में काफी कम है, जिससे ट्रस्ट को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस समझौते के लिए ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का कोई वैध प्रस्ताव पारित नहीं किया गया। साथ ही ट्रस्ट के चेयरमैन बृजलाल गोयल पर अपने पुत्र मनोज गोयल से जुड़े इस सौदे में हितों के टकराव की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि यह ट्रस्टियों की न्यासी जिम्मेदारियों के विपरीत है।
हालांकि ट्रस्ट के चेयरमैन बृजलाल गोयल ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि सुंदर फाउंडेशन में मनोज गोयल जुड़े हुए हैं, लेकिन संस्था के संचालन की मुख्य जिम्मेदारी सुनील रामदास के पास है। गोयल का कहना है कि ट्रस्ट के भीतर संपत्ति को लीज पर देने को लेकर सहमति है और इस संबंध में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन से 11 अन्य लोग भी जुड़ रहे हैं, जो भवन में विभिन्न गतिविधियों का संचालन करेंगे।
गोयल ने मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने की बात को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह भवन करीब डेढ़ वर्ष पहले अतिथि गृह के रूप में बनाया गया था ताकि राममंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा मिल सके। इसके अलावा कथा-वाचन और अन्य धार्मिक आयोजनों में आने वाले कथावाचकों एवं अतिथियों के लिए भी इसका उपयोग किया जाना है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस समय समझौता किया गया, उस समय बृजलाल गोयल ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर विधिवत अधिकृत नहीं थे। ऐसे में समझौते की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट को वित्तीय नुकसान पहुंचाने तथा ट्रस्ट कानून और सुशासन संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में अधिकारियों से मूल समझौते सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच, समझौते के लिए प्राप्त अधिकारों और स्वीकृतियों का सत्यापन तथा जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की संपत्ति और हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
एक और विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित
श्री ठाकुर रामचंद्र दूधाधारी मठ ट्रस्ट से जुड़ा एक अन्य विवाद भी न्यायालय में लंबित है। बताया जाता है कि दूधाधारी मठ के मुख्य ट्रस्टी महंत रामसुंदर दास हैं। एयरपोर्ट रोड स्थित जिस भूमि पर राममंदिर का निर्माण हुआ है, उस पर दूधाधारी मठ अपना दावा करता है। कहा जाता है कि साव परिवार ने यह भूमि ठाकुर रामचंद्र के नाम दान की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को नाबालिग माना जाता है और उनकी संपत्ति का संरक्षण न्यास द्वारा किया जाता है।
बताया गया कि करीब 15 वर्ष पहले दूधाधारी मठ के नाम से एक अन्य ट्रस्ट अस्तित्व में आया, जिसने मंदिर का निर्माण कराया। भूमि के स्वामित्व को लेकर महंत रामसुंदर दास लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट से महंत के पक्ष में फैसला आ चुका है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बृजलाल गोयल का कहना है कि मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।


