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मुंबई, 5 जून। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है।
मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसकी व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है।
उन्होंने कहा, “पॉलिमर नोटों को लेकर प्रस्ताव विचाराधीन है। इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी।”
गवर्नर ने कहा कि इस संबंध में प्रकाशित खबरों में कुछ हद तक सच्चाई है, लेकिन अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, "केंद्रीय बैंक इसके फायदे और नुकसान का अध्ययन कर रहा है और यह देख रहा है कि इसे लागू करना कितना व्यावहारिक होगा।"
गर्वनर ने बताया कि पॉलिमर नोटों के लाभ एवं चुनौतियों का मूल्यांकन किया जा रहा है और यह प्रक्रिया अभी शुरुआती स्तर पर है।
पॉलिमर नोट ऐसे मुद्रा नोट होते हैं जो कागज की जगह खास प्लास्टिक 'पॉलिमर' से बनाए जाते हैं। ये सामान्य नोटों से ज्यादा मजबूत एवं टिकाऊ होते हैं, पानी से खराब नहीं होते और इनमें बेहतर सुरक्षा फीचर होने से नकली नोट बना पाना मुश्किल होता है।
इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये मूल्यवर्ग के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा। इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था। हालांकि तकनीकी एवं परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।
इस बीच, आरबीआई ने कहा कि वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त मात्रा में नकदी उपलब्ध है और एटीएम में नकदी की किसी भी तरह की किल्लत को जल्द ही पूरा किया जाएगा।
गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास एटीएम एवं बैंक शाखाओं में नकदी उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त भंडार है और जरूरत पड़ने पर तेजी से आपूर्ति की जाएगी। (भाषा)


