ताजा खबर

वनाधिकार कानून लागू करने महंत का राष्ट्रपति को पत्र
30-May-2026 6:55 PM
वनाधिकार कानून लागू करने  महंत का राष्ट्रपति को पत्र

‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क

रायपुर, 30 मई। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर राज्य में वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(ग) को लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को लागू करने में छत्तीसगढ़ सरकार लगातार 18 वर्षों से विफल रही है।

महंत ने अपने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 1,58,000 हेक्टेयर वन भूमि पर गैर-कानूनी कब्जा है। इन जमीनों पर शक्तिशाली लोग और गैर-आदिवासी व्यक्तियों द्वारा बड़े पैमाने पर खनन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। जबकि आदिवासी और अन्य वनवासी परिवार इन जमीनों पर परंपरागत रूप से निर्भर हैं, लेकिन उन्हें उनके कानूनी अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(ग) के तहत वन क्षेत्र में स्थित जलाशयों पर मछली पालन और अन्य परंपरागत वन उपज के उपयोग का सामुदायिक अधिकार आदिवासियों और वनवासियों को दिया जाना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रावधान को लागू नहीं किया है।

महंत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार “मछली नीति” के नाम पर बड़े जलाशयों को बड़े ठेकेदारों और गैर-आदिवासी व्यक्तियों को पट्टे पर दे रही है। इन बड़े जलाशयों में आदिवासी और वनवासी लोग मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं, जबकि कानून के अनुसार इन संसाधनों पर उनका सामुदायिक अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 दिसंबर 2007 से पूरे देश में लागू है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसकी धारा 3(1)(ग) का क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ है।

डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को निर्देश दें कि वे वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(ग) को तत्काल प्रभाव से लागू करवाएं, ताकि आदिवासी और वनवासी समुदायों को उनके कानूनी अधिकार मिल सकें।


अन्य पोस्ट