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बीमा कंपनी का फर्जीवाड़ा: 16 साल बाद मिला इंसाफ
30-May-2026 11:32 AM
बीमा कंपनी का फर्जीवाड़ा: 16 साल बाद मिला इंसाफ

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की दखल के बाद मिला क्लेम 

'छत्तीसगढ़' संवाददाता 
रायपुर, 29 मई।
बेटे की मौत के बाद शुरू हुई एक पिता की कानूनी लड़ाई आखिरकार 16 साल बाद न्याय तक पहुंची। रायपुर निवासी अरविंद शाह के दिसंबर 2009 में बेटे की मौत के बाद परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। बीमा क्लेम के लिए संघर्ष शुरू हुआ, लेकिन डॉक्टर के एक सर्टिफिकेट के आधार पर दावा खारिज कर दिया गया।

परिवार का आरोप था कि बीमा कंपनी ने मामले में फर्जीवाड़ा किया। बताया गया कि संबंधित डॉक्टर दो दिन तक घर में रहकर परिवार से बातचीत करता रहा और बाद में ऐसा प्रमाण पत्र जारी किया, जिसके आधार पर क्लेम निरस्त कर दिया गया।

मामले को पहले छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी गई, लेकिन वहां भी परिवार को राहत नहीं मिली। इसके बाद पीड़ित पिता ने दिल्ली उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। करीब 13 साल तक चली कानूनी लड़ाई के दौरान कई दस्तावेज और तथ्यों की जांच हुई, जिसमें कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
दिल्ली आयोग ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने एक करोड़ 21 लाख रुपये के भुगतान का आदेश दिया, जिसमें से करीब 98 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है।

लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिलने पर पीड़ित पिता का कहना है कि अंतिम दौर तक लड़ाई लड़नी चाहिए और समझौता नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि बेटे को खोने का दुख कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन न्याय मिलने से व्यवस्था पर भरोसा कायम हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्याय मिलने में इतनी देरी नहीं होनी चाहिए।


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