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मच्छर भगाने वाली दवाई को पसंद करना सीख सकते हैं मच्छर
30-May-2026 9:36 AM
मच्छर भगाने वाली दवाई को पसंद करना सीख सकते हैं मच्छर

मच्छरों को उन्हें भगाने वाली दवाओं को पसंद करना सिखाया जा सकता है. इसकी ट्रेनिंग के बाद मच्छर उन लोगों को काटना पसंद करेंगे जिन पर इन दवाओं का प्रयोग किया गया है. आमतौर पर मच्छर भगाने वाली दवा उन्हें भगाती है लेकिन भोजन के साथ रख कर मच्छरों को इन्हें पसंद करने के लिए ट्रेन किया जा सकता है. 

एक प्रयोग के जरिए यह बात सामने आई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस प्रयोग को बेहद खास परिस्थितियों में किया गया है. इसमें कीड़े मारने वाली दवा डीईईटी के असर पर सवाल नहीं उठाए गए. 1940 के दशक में अमेरिका में विकसित हुई इस दवा ने बहुत से लोगों की जिंदगी मच्छरों के डंक से बचाई है. 

हालांकि, दुनिया को अब भी नई और ज्यादा असरदार, पर्यावरण अनुकूल दवाओं की जरूरत है जिनसे एलर्जी ना हो. इसका मतलब यह पता लगाना होगा कि आखिर इस दवा की वजह से मच्छर क्यों भागते हैं. यही जानने की कोशिश में फ्रांस के वैज्ञानिकों ने यह प्रयोग किया. यह प्रयोग एडिस एजिप्टी मच्छर पर किया गया जो डेंगू, जिका, पीला बुखार और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों को फैलाता है. 

प्रयोग के लिए मच्छरों को कपड़े के एक बाड़े में रखा गया, जहां भेड़ का ताजा खून भी रखा गया था. उम्मीद के मुताबिक मच्छर अपने भोजन पर टूट पड़े. दस सेकेंड के बाद वहां डीईईटी का छिड़काव हुआ, इसकी गंध से मच्छर वहां से भागे. तीन बार यही प्रक्रिया दोहराई जाने के बाद मच्छरों को सिर्फ डीईईटी के साथ जब रखा गया तो खून नहीं होने के बाद भी मच्छरों वहां से भागे नहीं बल्कि उसी तरफ बढ़ते रहे. उसके बाद एक वैज्ञानिक अपने हाथ पर डीईईटी का छिड़काव कर जब मच्छरों के सामने ले गए तो मच्छर उनके हाथ पर टूट पड़े. 

वैज्ञानिकों ने जब यही प्रयोग खून की बजाय चीनी के साथ किया तो भी यही नतीजा निकला. इससे वो इस नतीजे पर पहुंचे कि मच्छरों का दिमाग अनुभवों के आधार पर दवा पर होने वाली प्रतिक्रिया को बदल सकता है. वास्तव में मच्छर दवा में मौजूद जहर की वजह से नहीं बल्कि उसे लेकर अपनी समझ के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं.  हालांकि, प्रयोगशाला के बाहर की परिस्थितियां अलग होती हैं लेकिन वैज्ञानिकों को इससे काफी मदद मिलने की उम्मीद है. उन्होंने लोगों को मच्छर भगाने वाली दवाइयों के पैक पर लिखे निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की सलाह दी है क्योंकि उनमें रसायनों की मात्रा अलग अलग होती है. (dw.com/hi)


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