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भारत में इस साल औसत से कम रह सकती है मानसून की बारिश
30-May-2026 9:37 AM
भारत में इस साल औसत से कम रह सकती है मानसून की बारिश

भारत में मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल अल-नीनो प्रभाव देश में मानसून की बारिश को प्रभावित कर सकता है, जिससे तीन साल में पहली बार देश में औसत से कम बारिश हो सकती है. इससे खेती की पैदावार को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं. भारत में मानसून की बारिश से खेती की जरूरत का करीब 70 फीसदी पानी मिलता है. इससे जलाशय भर जाते हैं और भूजल भी रिचार्ज होता है. 

भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन के मुताबिक, इस साल मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत के 90 फीसदी तक पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि अल-नीनो प्रभाव जल्द ही विकसित हो सकता है और चार महीने तक चलने वाले मानसून सत्र के दौरान बारिश को प्रभावित कर सकता है. मानसून सत्र जून से शुरू होकर सितंबर तक जारी रहता है. 

भारत में पिछले 50 सालों में हुई मानसूनी बारिश का औसत 87 सेंटीमीटर है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, अगर इसके 96 फीसदी से 104 फीसदी तक बारिश होती है तो उसे औसत वर्षा माना जाता है. रविचंद्रन ने बताया कि इस साल जून में दीर्घकालिक औसत की तुलना में 92 फीसदी से भी कम बारिश होगी, जो औसत से कम की श्रेणी में आएगी. 

अल-नीनो प्रभाव तब विकसित होता है, जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान औसत से अधिक हो जाता है. यह आमतौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों में गर्म और सूखा मौसम लेकर आता है. 

पिछले सालों में जब भी अल-नीनो प्रभाव विकसित हुआ है, तब ज्यादातर मौकों पर भारत में औसत से कम बारिश हुई है. इसके चलते कई बार सूखे की स्थिति बनी है, फसलों को नुकसान पहुंचा है और अनाज निर्यात पर प्रतिबंध भी लगाने पड़े हैं. (dw.com/hi)


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