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नीट पेपर लीक से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक स्पष्ट जवाबदेही नहीं तय की जाती, तब तक समस्या बनी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर एनटीए को भंग करने की मांग की गई थी. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि एनटीए को यूपीएससी जैसे अन्य निकायों से सीखना चाहिए, जो बिना किसी पेपर लीक के बड़े पैमाने पर प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का भी निर्देश दिया है कि एनटीए द्वारा नीट परीक्षाओं के आयोजन को किस तरह संस्थागत रूप दिया जाएगा. कोर्ट का कहना है कि एनटीए के पास पर्याप्त भौतिक और बौद्धिक संसाधन होने चाहिए ताकि पेपर लीक जैसी घटनाएं ना हों. इस दौरान केंद्र सरकार की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं.
साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा को मजबूत करने के सुझाव देने के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया था. इस समिति के प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और 60 अल्पकालिक सुझाव दिए थे, जिनमें से ज्यादातर लागू किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि सुधारों की वजह से नीट-पीजी 2025 परीक्षा में काफी हद तक सकारात्मक परिणाम हासिल हुए थे. इसके बाद कोर्ट ने इस साल सामने आई दिक्कतों को लेकर सवाल उठाए. (dw.com/hi)


