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पता होता पानी के लिए इतना संघर्ष है, तो शादी करके नहीं आती...
29-May-2026 9:45 PM
पता होता पानी के लिए इतना संघर्ष है, तो शादी करके नहीं आती...

  आज भी झरिया खोदकर भरना पड़ रहा पानी  

शंभू यादव

कोण्डागांव, 29 मई (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता )। जिला मुख्यालय कोण्डागांव से महज 5 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत कुम्हारपारा का कोपरापारा इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। गांव की सरहद से शहर की सीमा साफ दिखाई देती है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि महिलाएं आज भी पीने के पानी के लिए नदी किनारे झरिया खोदने को मजबूर हैं।

दोपहर की तेज गर्मी में जब मीडिया टीम कोपरापारा पहुंची तो गांव की महिलाएं सिर पर बर्तन रख नारंगी नदी की ओर जाती दिखाई दीं। नदी किनारे रुके हुए पानी में कुछ महिलाएं कपड़े धो रही थीं, वहीं दूसरी ओर रेत खोदकर बनाए गए छोटे-छोटे झरिया से पीने का पानी भरा जा रहा था। पास में मवेशी भी उसी पानी के आसपास नजर आए। उमस और गर्मी के बीच आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोती महिलाओं की थकान उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।

इसी दौरान गांव की नवविवाहिता पिंकी चक्रधारी ने मीडिया के सामने जो कहा, उसने पूरे संकट की तस्वीर बयां कर दी। पिंकी ने कहा, पता होता पानी के लिए इतनी परेशानी है, तो शादी करके आती ही नहीं।

पिंकी ने बताया कि वे करंजी से शादी होकर कुम्हारपारा आई हैं। मायके में घर पर बोरवेल की सुविधा थी, लेकिन यहां रोज नदी तक जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार निजी बोरवेल से पानी लेने पर पैसे देने के बाद भी लोगों की बातें सुननी पड़ती हैं। मजबूरी में महिलाएं नदी के झरिया से पानी भरकर घर ले जाती हैं।

कोपरापारा में लगभग 35 से अधिक परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बस्ती में दो शासकीय बोर हैं, लेकिन आबादी के हिसाब से वे नाकाफी हैं। वहीं गांव में मौजूद निजी बोरवेल से हर किसी को आसानी से पानी नहीं मिल पाता।

महिला पंच लक्षणबत्ती चंदेल ने बताया कि गर्मी में किसी तरह नदी और झरिया से काम चल जाता है, लेकिन बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में नदी का पानी गंदा हो जाता है और तब पीने के पानी का संकट और गहरा जाता है। महिलाओं ने गांव में तत्काल कम से कम एक नए हैंडपंप की मांग की है, जबकि पूरे मोहल्ले के लिए तीन हैंडपंप की जरूरत बताई जा रही है।

 

दिनेश्वरी यादव ने कहा कि पानी नहीं होने के कारण रोज नदी तक जाना पड़ता है। वहीं लक्ष्मी चंदेल ने बताया कि छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के बाद महिलाएं नदी जाकर कपड़े धोती हैं और पीने का पानी भरकर घर लौटती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बोरवेल से पानी मांगने पर कई बार अपमान भी सहना पड़ता है।

ग्राम पंचायत कुम्हारपारा के सरपंच हेमचंद कोराम ने बताया कि बीते डेढ़ वर्ष से समस्या गंभीर हुई है। उनके अनुसार नेशनल हाईवे 130डी चौड़ीकरण और नल-जल योजना के दौरान पाइपलाइन मरम्मत के बाद कोपरापारा तक पानी पहुंचना प्रभावित हुआ। सरपंच ने कहा कि पाइपलाइन की सही ढाल नहीं मिलने के कारण पानी मोहल्ले तक नहीं पहुंच पा रहा है।

उन्होंने बताया कि समस्या को लेकर विधायक लता उसेंडी और जनपद सदस्य को जानकारी दी गई है। पिछले वर्ष एक हैंडपंप स्कूलपारा में स्वीकृत हुआ था, लेकिन कोपरापारा में अब तक नई सुविधा नहीं मिल सकी है। सरपंच ने यह भी बताया कि पंचायत को 15वें वित्त आयोग की राशि राजस्व ग्राम संबंधी तकनीकी कारणों से उपयोग के लिए नहीं मिल पा रही है, जिससे पेयजल सहित अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

इधर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता सीएस सोनवानी ने बताया कि विधायक के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया है। निरीक्षण में पाया गया कि नेशनल हाईवे निर्माण के बाद पानी की टंकी का एक अतिरिक्त सोर्स डिस्कनेक्ट हो गया है, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि संबंधित ठेकेदार को आवश्यक सामग्री मंगाने के निर्देश दिए गए हैं और दोनों सोर्स को जोडक़र जल्द टंकी से नियमित सप्लाई बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीणों की ओर से नए हैंडपंप की मांग की गई है, जिसके लिए उच्च कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अफसर के अनुसार वर्तमान में कुछ घरों तक टंकी से पानी पहुंच रहा है, लेकिन बिजली कटौती की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ग्रामीण हैंडपंप की मांग कर रहे हैं।

स्मार्ट गांव, नल-जल योजना और ग्रामीण विकास के दावों के बीच मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर बसे कुम्हारपारा की महिलाएं आज भी झरिया खोदकर पानी पीने को मजबूर हैं। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि आखिर उनके गांव तक राहत कब पहुंचेगी।


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