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अभ्यर्थी पहुंचे हाईकोर्ट, इंटरव्यू रोकने की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 23 मई। पारदर्शिता के तमाम दावों के बीच छत्तीसगढ़ लोक आयोग की इस बार हुई परीक्षा भी विवादों में घिर गई है। 19 अप्रैल 2026 को आयोजित मुख्य परीक्षा का परिणाम महज एक सप्ताह के भीतर जारी किए जाने के बाद पूरी चयन प्रक्रिया को सवालों के घेरे में लाया गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इतने कम समय में उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन संभव ही नहीं था। आयोग से लगातार शिकायतों के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अभ्यर्थियों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की सुनवाई 21 मई को अवकाशकालीन पीठ में न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित सिंह राठौर और दीपा श्रीवास ने दलील दी कि कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 की चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
अभ्यर्थियों के अनुसार चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू 22 मई से प्रस्तावित थे, जिसके बाद नियुक्तियां दी जानी थीं। याचिका में मुख्य परीक्षा की न्यायिक जांच, सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने, इंटरव्यू प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मूल्यांकन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग ने पहले उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया। इसके बाद सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी गई, लेकिन वहां भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कोर्ट में भी आयोग की ओर से ठोस जवाब पेश नहीं किए जाने के कारण अगली सुनवाई अब 5 अगस्त 2026 तय की गई है।
असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि कई ऐसे उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चयनित हुए हैं, जिन्होंने मुख्य परीक्षा में लगभग खाली उत्तर पुस्तिकाएं जमा की थीं। एक ही परीक्षा कक्ष से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड के पालन में भेदभाव के आरोप भी लगाए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ उम्मीदवारों को विशेष छूट दी गई, जबकि सामान्य परीक्षार्थियों पर सख्त नियम लागू किए गए।
अब अभ्यर्थियों ने संकेत दिए हैं कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि पारदर्शिता नहीं होने से योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।


