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पुलिस हत्या का मामला समझकर कर रही थी जांच
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 23 मई। कोहड़िया क्षेत्र में सड़क किनारे झाड़ियों में मिले 37 वर्षीय युवक के शव का मामला नया मोड़ ले चुका है। जिस घटना को पुलिस शुरुआत में हत्या मानकर जांच कर रही थी, वह पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच में आत्महत्या निकली।
पुलिस के अनुसार मृतक मस्तूरी के बसंत पटेल ने टूटी हुई बीयर बोतल के कांच से खुद को घायल कर अपनी जान दी थी। इस खुलासे के बाद पूरे मामले की दिशा बदल गई है।
10 मई को सीएसईबी चौकी क्षेत्र के कोहड़िया इलाके में सड़क किनारे झाड़ियों के बीच खून से सना शव मिला था। घटनास्थल पर खून के निशान और शव को घसीटे जाने जैसे संकेत मिलने से हत्या की आशंका जताई गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंचे थे। वहीं टूटी हुई बीयर बोतल भी बरामद की गई थी।
पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच में हत्या के कोई प्रमाण नहीं मिले। जांच में सामने आया कि मृतक ने बीयर बोतल के नुकीले कांच से खुद को चोट पहुंचाई थी। डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में चोटों को स्वयं द्वारा पहुंचाई गई चोट माना गया है।
गवाहों के बयान से यह भी पता चला कि बसंत मानसिक रूप से परेशान रहता था और उसका इलाज चल रहा था। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई, जिसमें किसी अन्य संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी नजर नहीं आई।
मृतक पिछले तीन वर्षों से कोरबा के सर्वमंगला बरमपुर में किराये के मकान में रह रहा था। वह औद्योगिक क्षेत्र की संजय फैक्ट्री में काम करता था। 9 मई की सुबह फैक्ट्री जाने के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। अगले दिन उसका शव मिला।
मां की मौत के बाद नवजात को अस्पताल के बाहर ले जाकर 3 लाख में बेच दिया
कोरबा, 23 मई। प्रसव के कुछ समय बाद मां की मौत हो गई तो पिता ने नवजात को अपने साथ ले जाने से इनकार कर दिया। उसने अस्पताल के बाहर एंबुलेंस चालक को बच्चा सौंप दिया। इसमें तीन लाख रुपये में सौदा करने की बात भी सामने आ रही है।
जानकारी के अनुसार, करतला थाना क्षेत्र के तुरीकटरा गांव निवासी सरजू प्रसाद राठिया अपनी गर्भवती पत्नी रामशीला राठिया को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा था। शुक्रवार तड़के महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पत्नी की मौत के बाद सरजू शव को गांव ले जाने के लिए तैयार था, लेकिन उसने नवजात को साथ ले जाने से मना कर दिया। उसने कहा कि पहली पत्नी से उसके पहले ही दो बच्चे हैं। इस बीच मीडिया और अस्पताल प्रबंधन को आशंका हुई कि बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा सकता है।
कुछ देर बाद परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल परिसर से बाहर निकले और मुख्य सड़क पर संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस चालक निर्मल कुमार राठौर से मिले। निर्मल बच्चे को लेकर अपने घर चला गया, जबकि मृतका का शव गांव ले जाया गया।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब दोनों पक्षों के बीच हुए एक शपथपत्र की जानकारी सामने आई। इसमें नवजात को बेहतर पालन-पोषण के लिए सौंपने का उल्लेख किया गया। दस्तावेज में तीन लाख रुपये के लेनदेन और ऋण का भी जिक्र था।
राठौर ने स्वीकार किया कि उसकी सरजू से पहले से पहचान थी। उसने बताया कि संतान नहीं होने के कारण वह बच्चा रखना चाहता था। उसने यह भी कहा कि आर्थिक जरूरत बताने पर उसने दो लाख रुपये ऑनलाइन और एक लाख रुपये नकद दिए थे।
शपथपत्र में अस्पताल कॉलोनी का पता दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि वहां केवल सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रहते हैं। पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।


