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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग की है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा दिया जाना चाहिए. देश की बहुसंख्यक आबादी न केवल गाय को पवित्र मानती है, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है."
"ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि आखिर कौन-सी राजनीतिक मजबूरी सरकार को गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने से रोक रही है? नफ़रत की राजनीति, मॉब लिंचिंग, गाय के नाम पर निर्दोष लोगों की हत्या और मुसलमानों को बदनाम करने का अभियान अब समाप्त होना चाहिए."
"हैरानी की बात यह है कि कुछ राज्यों में खुलेआम बीफ़ बेचा जाता है, लेकिन उसके खिलाफ न तो कोई विरोध प्रदर्शन होता है और न ही मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आती हैं."
"वहीं, जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां गाय के नाम पर खून बहाया जाता है. यह भक्ति नहीं, बल्कि दोहरा मापदंड और राजनीतिक खेल है."
"समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के पक्ष में यह कहते हुए जोरदार प्रचार किया जा रहा है कि अगर देश एक है, तो कानून भी एक होना चाहिए. लेकिन पशु वध से जुड़े कानून पूरे देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं. कई ऐसे राज्य हैं जहां खुलेआम बीफ़ खाया जाता है और वहां इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है."
"हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा दिया जाए, ताकि यह विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो सके." (bbc.com/hindi)


