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35 साल नौकरी, अब जाति प्रमाण पत्र पर सवाल
20-May-2026 11:25 AM
35 साल नौकरी, अब जाति प्रमाण पत्र पर सवाल

आबकारी अधिकारी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 20 मई। मध्यप्रदेश में पदस्थ एक वरिष्ठ आबकारी अधिकारी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। आरोप है कि अधिकारी ने कथित फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र के आधार पर करीब 35 वर्षों तक नौकरी की। मामले में हाईकोर्ट ने बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति को जांच तेज करने और निर्धारित समय में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

भोपाल निवासी प्रभात पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त के पद पर पदस्थ राजेश हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल की। शिकायत के अनुसार, इस संबंध में 22 जून 2024 को औपचारिक शिकायत की गई थी, लेकिन बिलासपुर की जिला स्तरीय जाति जांच समिति में मामला लंबे समय से लंबित पड़ा है।

याचिका में कहा गया कि लगातार हो रही देरी से जांच प्रक्रिया का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। साथ ही मांग की गई कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को आरक्षित वर्ग का लाभ न दिया जाए और प्रमाण पत्र गलत पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित शिकायतों का निराकरण उचित समयसीमा में होना चाहिए। अदालत ने सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए जांच समिति को तय समय के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया गया कि अधिकारी के प्रमाण पत्र पर बिलासपुर तहसील की मुहर और हस्ताक्षर हैं, लेकिन वर्ष 1990-91 के दायरा पंजी में संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी आधार पर प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।


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