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युवती और डेढ़ साल की बच्ची की हत्या मामले में दोषी की उम्रकैद बरकरार
14-May-2026 1:01 PM
युवती और डेढ़ साल की बच्ची की हत्या मामले में दोषी की उम्रकैद बरकरार

हाईकोर्ट ने कहा- वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट से पूरी तरह साबित हुआ अपराध
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 14 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने युवती और उसकी डेढ़ वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में दोषी विक्की उर्फ सुखीराम यादव की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाण आरोपी के अपराध को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं।

मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित जोरा इलाके का है। आरोपी विक्की उर्फ सुखीराम यादव का एक नाबालिग युवती से प्रेम संबंध था। इसी दौरान युवती गर्भवती हो गई। जब युवती ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने युवती पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया। युवती ने कहा कि वह केवल कोर्ट मैरिज के बाद ही केस वापस लेगी।

अदालत में प्रस्तुत विवरण के अनुसार 22 जनवरी 2022 को आरोपी ने युवती को फोन कर सूनसान स्थान पर बुलाया। वहां उसने फिर से केस वापस लेने के लिए दबाव डाला। युवती के इनकार करने पर आरोपी ने चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने युवती की डेढ़ साल की मासूम बच्ची का गला दबाकर उसे बेहोश कर दिया और रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया, जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से बच्ची की मौत हो गई।

जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची और आरोपी का डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें यह पुष्टि हुई कि आरोपी ही बच्ची का जैविक पिता था।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को हत्या के दो मामलों में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। साथ ही सबूत मिटाने के आरोप में पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा पॉक्सो एक्ट के तहत भी दोषी ठहराया गया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल जांच, डीएनए विश्लेषण, आरोपी के कथन और बरामदगी सहित सभी साक्ष्य एक ऐसी श्रृंखला बनाते हैं, जो आरोपी के दोषी होने के अलावा किसी अन्य संभावना की गुंजाइश नहीं छोड़ते।

 


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