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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 3 मई। मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में कथित रूप से फर्जी हलफनामा और दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा दावा पेश करने के आरोप में चार अधिवक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश (अत्याचार) की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। इस प्रकरण में सिविल लाइन थाना पुलिस पहले ही विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर चुकी है।
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता एन.पी. चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम और सूरज वस्त्रकार ने एक मोटर एक्सीडेंट केस में मृतक प्रभात कुजूर की पत्नी के रूप में प्रेमिका कुजूर को प्रस्तुत कर मुआवजा दावा दाखिल किया था। लेकिन जांच के दौरान प्रेमिका कुजूर खुद कोर्ट में पेश हुई और स्पष्ट किया कि वह मृतक की पत्नी नहीं, बल्कि उसके भाई की पत्नी है। उसने यह भी कहा कि उसने कोई हलफनामा नहीं दिया और न ही किसी वकील को अधिकृत किया। इसी तरह मिथिलता कुजूर ने भी बयान दिया कि उसने किसी दस्तावेज या वकालतनामा पर हस्ताक्षर नहीं किए। इन खुलासों के बाद अदालत ने सिविल लाइन थाने को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए।
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी स्वयं अधिवक्ता हैं और कानून की जानकारी रखते हुए भी उन्होंने जानबूझकर धोखाधड़ी की। वहीं बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपियों ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कार्य किया और वे निर्दोष हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और इस स्तर पर आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए आदेश की प्रति सिविल लाइन थाने को भेजने के निर्देश दिए।
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना, झूठी पहचान, फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी और न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें कुछ धाराओं में 7 साल और कुछ में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।


