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बेंच हंटिंग पर सर्कुलर सिर्फ चेतावनी, सुनवाई से अलग होने का आदेश नहीं-सीजे
03-May-2026 2:51 PM
बेंच हंटिंग पर सर्कुलर सिर्फ चेतावनी, सुनवाई से अलग होने का आदेश नहीं-सीजे

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 3 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेंच हंटिंग यानी पसंद की बेंच चुनने की प्रवृत्ति पर जारी सर्कुलर को लेकर स्थिति साफ की है। अदालत ने कहा है कि यह सर्कुलर केवल न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए एक चेतावनी है, न कि जजों को सुनवाई से अलग होने का निर्देश।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक दंपति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि सर्कुलर का उद्देश्य निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है, न कि अदालत के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करना।

दरअसल, 17 अप्रैल 2026 को यह मामला एक अन्य डिवीजन बेंच के समक्ष आया था, जहां एक जज ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। उस बेंच ने 16 अप्रैल को जारी सर्कुलर को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे न्यायालय की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप जैसा बताया था और मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 29 अप्रैल को यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की बेंच में हुई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि “बेंच हंटिंग” का मतलब है, किसी मामले को जानबूझकर ऐसे जज या बेंच के सामने लाने की कोशिश करना, जिससे पक्षकार को लाभ मिलने की उम्मीद हो। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए खतरा बताया है।
कोर्ट ने कहा कि सर्कुलर का मकसद केवल जजों को सतर्क करना है, ताकि कोई पक्षकार अदालत को अपने हित में प्रभावित न कर सके। यदि किसी मामले में बेंच हंटिंग की आशंका दिखती है, तो जज अपने विवेक से निर्णय ले सकते हैं कि वे सुनवाई से अलग हों या नहीं।


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