ताजा खबर
दिसंबर 2025 में पुलिस ने 6 गैस कैप्सूल गाड़ी पकड़ी थी, जिसमें 90 टन एलपीजी गैस लोड था
घरेलू-कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बेच दिया और जिला प्रशासन से शिकायत की कि एलपीजी गैस लीक हो गई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 3 मई। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक पर 1.5 करोड़ की एलपीजी गैस की चोरी का आरोप है।
मालूम हो कि दिसंबर 2025 में पुलिस ने 6 गैस कैप्सूल गाड़ी पकड़ी थी। जिसमें 90 मीट्रिक टन एलपीजी गैस लोड था। लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होने के कारण सभी गाडिय़ां थाने में खड़ी कर दी गई थी। इसके बाद थाने में वाहनों और एसपीजी गैस सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर गाडिय़ां ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को सौंप दी गई थी।
आरोप है कि कंपनी के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने प्लानिंग कर उक्त गैस को घरेलू-कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बेच दिया और जिला प्रशासन से शिकायत की कि एलपीजी गैस लीक हो गई।
जांच में चोरी पकड़े जाने के बाद पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है, लेकिन इनमें से मालिक और डायरेक्टर फरार है। जबकि कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने पकड़ा है। मामला सिंघोड़ा थाना क्षेत्र का है।
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने प्रेस वार्ता लेकर जानकारी दी है कि दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा। इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए।
बताया कि इसी आदेश के तहत 30 मार्च को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा। खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को सभी 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए गए। संतोष ठाकुर अपने स्टाफ की मदद से सभी गाडिय़ां सिंघोड़ा थाने से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।
एसपी के मुताबिक हैंडओवर के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया। इसी लापरवाही का फ ायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर, डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने गैस को अवैध रूप से बेचने की साजिश रची।
थाना सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे (वजन करने की जगह) होने के बावजूद उन्होंने कहीं भी वजन नहीं कराया। सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग में खड़ा कर दिया गया। इसके बाद 5 गाडिय़ों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।
इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया। इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेज दी गई।
एसपी के मुताबिक वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी। इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन से शिकायत की कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया।
बताया कि इस पूरे मामले में जब राष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट की मदद से जांच की गई तो पाया गया कि कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित था और इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं था। इससे साफ हुआ कि गैस जानबूझकर किसी ने निकाली है। एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना के 3 महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस का निकल जाना संभव ही नहीं है।
इसके बाद दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी। लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।
रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रो केमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी। लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई। जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।
पुलिस ने अभी तक कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव 41 साल को गिरफ्तार किया है। जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांट मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, लैपटाप और कई दस्तावेज जब्त किए हैं।
जांच में यह भी पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफि स में आरोपियों ने सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की गई है। प्लांट के गेट पर जो वाहनों की एंट्री-एग्जिट और खरीद-बिक्री का रजिस्टर रखा जाता था। उससे अवैध लेन-देन करने वाली गाडिय़ों और एजेंसियों की पहचान हो सकती थी। इसी तरह ऑफि स में बिना बिल की खरीदी-बिक्री का रिकॉर्ड भी रखा जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रजिस्टर ही गायब कर दिया गया। जब जांच के दौरान आरोपियों को बुलाया गया, तो उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की। इसी आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।


