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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 अप्रैल। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर नगर निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जवाब से असंतुष्ट होते हुए अदालत ने नया शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद तय की गई है।
मामले पर एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट में बताया गया था कि सिरगिट्टी नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 स्थित बन्नाक चौक के शासकीय प्राथमिक स्कूल परिसर में नाली निर्माण के लिए लाए गए लोहे के सरिए अव्यवस्थित ढंग से रखे गए थे।
यह स्कूल कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए संचालित होता है। सरियों की इस तरह की मौजूदगी न केवल बच्चों के लिए गंभीर खतरा थी, बल्कि उनके पढ़ाई के माहौल को भी प्रभावित कर रही थी। बच्चे इसी परिसर में खेलते हैं और सुबह की प्रार्थना सभा भी यहीं आयोजित होती है, ऐसे में किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि गुड फ्राइडे के दिन, जो एक सार्वजनिक अवकाश था, नाली निर्माण का कार्य किया जा रहा था। स्कूल परिसर में बाउंड्री वॉल नहीं होने का फायदा उठाकर ठेकेदार ने बिना अनुमति के सरियों को वहां रख दिया।
अगले दिन जब स्कूल खुला, तो प्रधान पाठिका ने स्थानीय लोगों से जानकारी ली और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तुरंत सरियों को हटवाने की व्यवस्था कराई।
इस घटनाक्रम पर हाईकोर्ट ने पहले ही नगर निगम आयुक्त से शपथपत्र के जरिए जवाब मांगा था। हालांकि, प्रस्तुत जवाब से संतुष्ट न होने पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अब विस्तृत और स्पष्ट नया शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।


