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124 बिंदुओ की चेकलिस्ट के साथ स्मार्ट विवेचना लागू
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 अप्रैल। गंभीर अपराधों, खासकर हत्या के मामलों में दोषियों के बच निकलने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बिलासपुर रेंज पुलिस ने अब जांच की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने अधिकारियों को ‘स्मार्ट विवेचना’ की नई रणनीति पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि अब हर हत्या मामले में 100 प्रतिशत दोषसिद्धि लक्ष्य होना चाहिए।
प्रशिक्षण सत्र में एएसपी से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हुए। आईजी गर्ग ने कहा कि पुलिस का काम केवल आरोपी को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि अदालत में ठोस साक्ष्यों के आधार पर उसे सजा दिलाना है।
नई व्यवस्था के तहत हत्या के हर मामले में चार्जशीट तैयार करते समय 124 बिंदुओं वाली विस्तृत चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य किया गया है, जिससे जांच में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी न रह जाए।
जांच प्रक्रिया में अब ‘ई-साक्ष्य’ एप के जरिए जब्ती की पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। इसके अलावा अपराध स्थल को तुरंत सील कर ‘गोल्डन ऑवर’ में फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। बिना दस्ताने किसी भी साक्ष्य को छूने पर रोक रहेगी।
डिजिटल जांच को भी विशेष महत्व दिया गया है। अब आरोपियों के मोबाइल और इंटरनेट डेटा, व्हाट्सएप चैट, गूगल टेकआउट समेत अन्य डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच की जाएगी। ‘त्रिनयन’ एप के जरिए 100 किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग कर फुटेज को केस डायरी में शामिल किया जाएगा। डीएनए और जैविक साक्ष्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जैसे पीड़ित के नाखूनों में मिले त्वचा के अंश, बाल या कपड़ों पर मौजूद निशान, जिससे आरोपी की मौजूदगी को वैज्ञानिक तरीके से साबित किया जा सके।
संवेदनशील मामलों में रात के समय भी पोस्टमार्टम की अनुमति दी गई है, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। यदि रिपोर्ट में कोई अस्पष्टता होती है, तो उसे फॉरेंसिक साइंस लैब भेजकर विशेषज्ञ राय ली जाएगी। साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘चेन ऑफ कस्टडी’ का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिसमें साक्ष्य के संग्रहण से लेकर मलकाना और एफएसएल तक हर चरण का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
आईजी गर्ग ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद दर्ज सभी हत्या मामलों की जांच इसी नई प्रणाली के अनुसार की जाए। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी आधुनिक तकनीकों में दक्ष बन सकें और जांच की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।


