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डिजिटल अरेस्ट कर 82 वर्षीय रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी
30-Apr-2026 12:18 PM
डिजिटल अरेस्ट कर 82 वर्षीय रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी

आतंकी फंडिंग में फंसाने की धमकी देकर 7 दिन तक बनाया बंधक

सुप्रीम कोर्ट-ईडी की फर्जी नोटिस से डराकर निकलवाए पैसे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 30 अप्रैल। साइबर ठगों ने 82 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे एक करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ठग लिए। महिला को इतना भयभीत कर दिया गया कि उसने अपनी पूरी जीवनभर की जमा पूंजी चार अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। घटना का खुलासा तब हुआ जब ठगों ने महिला से अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद मुंबई में रह रहे उनके बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचकर रेंज साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शहर के रियल हेवन कॉलोनी शांतिनगर में रहने वाली उक्त प्रोफेसर का निवास है। पुलिस के अनुसार, ठगों ने 20 अप्रैल को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए महिला से संपर्क किया। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्होंने महिला पर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा होने का झूठा आरोप लगाया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज, जिनमें सुप्रीम कोर्ट, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और रिजर्व बैंक के नाम से बने नकली नोटिस शामिल थे, भेजकर महिला को उम्रकैद की सजा का डर दिखाया गया।

ठगों ने महिला को लगातार निगरानी में रखते हुए घर से बाहर न निकलने और हर गतिविधि की जानकारी देने के लिए मजबूर किया। करीब सात दिनों तक चले इस मानसिक दबाव के दौरान महिला से किश्तों में रकम ट्रांसफर कराई गई, ताकि बैंक को संदेह न हो।

महिला ने 21 से 24 अप्रैल के बीच आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग खातों में रकम भेजी। 21 अप्रैल को 20.20 लाख, 22 अप्रैल को 34.20 लाख, 23 अप्रैल को 15.20 लाख और 24 अप्रैल को 35.20 लाख रुपये। यह रकम आईसीआईसीआई बैंक और सिटी यूनियन बैंक के खातों में जमा कराई गई।

जब महिला के पास पैसे खत्म हो गए, तो ठगों ने उसे अपने बेटे से 50 लाख रुपये मंगवाने का दबाव बनाया। इसी दौरान बेटे को पूरे मामले की जानकारी मिली और ठगी का पर्दाफाश हुआ।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि ठगों ने उसे विश्वास में लेने के लिए फर्जी डेबिट कार्ड और सुप्रीम कोर्ट का नकली वारंट भी भेजा था। इस पूरे घटनाक्रम में महिला के एफडी और पीपीएफ जैसे जीवन भर की बचत पूरी तरह खाली हो गई।

मामले में रेंज साइबर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 308(6) तथा आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों को फ्रीज करने की कोशिश कर रही है, जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई।


पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, विशेषकर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहें और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।


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