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साथियों को क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर बच्चों का किया अपहरण,धमकी- चार गिरफ्तार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 अप्रैल। सत्तर लाख रुपये की ज्वेलरी चोरी के मामले में पुलिस जांच के बाद हैरान कर देने वाला सच सामने आया है। जिस व्यक्ति ने चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी, वह अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पुलिस बनकर नाबालिग बच्चों को डराने-धमकाने में जुटा था। पुलिस ने इस मामले में शिकायतकर्ता सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामले के अनुसार, आसमां सिटी निवासी सतीश मिश्रा ने सकरी थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसके बेटे के नाबालिग दोस्तों ने उसके घर से 70 लाख रुपये के जेवर चोरी कर बेच दिए। कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर भी सवाल उठाए।
इसी बीच, दूसरी ओर से एक नाबालिग बच्चे की मां ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि सतीश मिश्रा ने उसके बेटे को अपने घर बुलाकर धमकाया और चोरी का सामान वापस करने के लिए दबाव बनाया। बच्चों को डराने के लिए उसने उनके सामने अपने ही बेटे की बेल्ट से पिटाई भी की।
जांच में सामने आया कि चार दिन बाद सतीश मिश्रा फिर से नाबालिग बच्चों को अपने घर ले गया, जहां उसने अपने चार साथियों को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर बच्चों को भयभीत किया। इसके बाद सभी बच्चों को पुलिस लिखी गाड़ी में बिठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां कुछ समय तक डराने-धमकाने के बाद उन्हें नेहरू चौक के पास छोड़ दिया गया।
पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद सतीश मिश्रा के साथ योगेश पांडे उर्फ भूरू (शारदा विहार, सकरी), आशीष शर्मा (मंगला अभिषेक विहार) और प्रभात ठाकुर (बंधवापारा, सरकंडा) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का एक अन्य सदस्य विनय साहू फरार है, जिसकी तलाश जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी पहले भी कोटा थाना क्षेत्र में फर्जी क्राइम ब्रांच पुलिस बनकर उगाही करने के मामले में पकड़े जा चुके हैं। ये सभी आरोपी पूर्व में पुलिस अधिकारियों के निजी वाहन चालक रह चुके हैं, जिसका फायदा उठाकर वे लोगों को झांसे में लेते थे।


