ताजा खबर
हाईकोर्ट ने घायल गवाह की गवाही को पुख्ता माना, अपील खारिज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 29 अप्रैल। भूमि विवाद में तीन लोगों की निर्मम हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी पिता-पुत्र की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई गवाह स्वयं घटना में घायल हुआ है, तो उसकी उपस्थिति घटनास्थल पर स्वाभाविक मानी जाती है। ऐसे गवाह की गवाही को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वह पीड़ित परिवार से जुड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि गवाही की विश्वसनीयता, निरंतरता और तार्किकता को ध्यान में रखते हुए उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
यह घटना 11 सितंबर 2020 की सुबह 4 से 5 बजे के बीच महासमुंद जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र के जोबा गांव में हुई थी। जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर आरोपी परसराम गायकवाड़ और बृज सेन गायकवाड़, ओसराम गायकवाड़ के घर में घुस गए। उन्होंने ओसराम और उसकी पत्नी जागृति की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उन पर चाकू से हमला किया।
हमले से बचने के लिए ओसराम अपने भाई के घर भाग गया, लेकिन आरोपी यहीं नहीं रुके। उन्होंने घर में मौजूद उसकी पत्नी जागृति, 16 वर्षीय बेटी टीना और 9 वर्षीय बेटे मनीष की गला रेतकर हत्या कर दी। इसके अलावा, एक अन्य कमरे का दरवाजा तोड़कर बेटी गीतांजलि, बेटे ओमन और वृद्ध मां अनारबाई पर भी हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई थी, जिसमें हत्या (धारा 302/34) के तहत तीन बार आजीवन कारावास, हत्या के प्रयास (धारा 307/34) और घर में घुसकर अपराध (धारा 459) जैसी धाराएं शामिल हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी सजा आदेशों को सही ठहराते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।


