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RUPSA SENGUPTA
-रुपसा सेनगुप्ता
"जब मैं 2019 में वायरल हुई, तब घर पर बहुत लोग आते थे, मीडिया से, किसी कार्यक्रम में बुलाने वाले, सिर्फ़ मिलने के लिए आने वाले. अब पांच-छह साल बाद लोग मिलते हैं और अगर वह मुझे पहचान जाते हैं तो गाने के लिए कहते हैं."
यह वही रानू मंडल हैं, जिनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर साल 2019 में वायरल हुआ और वह रातों-रात मशहूर हो गईं.
उन्हें गीत गाने के ऑफ़र मिलने लगे लेकिन फिर धीरे-धीरे वह चर्चा से बाहर होती चली गईं.
वह अब कहां हैं, कैसी हैं- यह जानने के लिए बीबीसी की टीम उनके घर पहुंची.
पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के राणाघाट की रहने वालीं रानू की दिलचस्पी बचपन से ही संगीत में थी. वह लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार और मोहम्मद रफ़ी के गानों को सुनते हुए बड़ी हुई थीं और वह उन गीतों को सुनने के साथ गाती भी थीं.
गाने के इस शौक ने ही रानू मंडल को इंटरनेट पर प्रसिद्धि भी दिलाई और इसकी शुरुआत हुई थी राणाघाट रेलवे स्टेशन से.
बात 2019 की है. एक दिन वह स्टेशन पर मशहूर गायिका लता मंगेशकर का गाना 'एक प्यार का नगमा है' गा रही थीं. तभी एक स्थानीय युवक ने उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया.
लोगों ने रानू की आवाज़ को खूब सराहा. रातों-रात वह मशहूर हो गईं. फिर एक के बाद एक स्टेज शो और कार्यक्रमों में गाने के ऑफ़र आने लगे.
मुंबई के एक रियलिटी शो में उन्हें आमंत्रित किया गया, जहां संगीतकार हिमेश रेशमिया को उनका गाना पसंद आया और उन्होंने रानू मंडल को अपनी फ़िल्म में प्लेबैक सिंगिंग का ऑफ़र दिया.
लोगों के बीच वह चर्चा का विषय थीं. लेकिन यह सब ज़्यादा समय तक नहीं रहा और अब वह दो कमरे के एक मंज़िला मकान में अकेली रहती हैं.
आस-पास वाले करते हैं देख-रेख
रानू मंडल के घर के बाहर कभी मीडिया की भीड़ लगी रहती थी. लोग उनसे मिलने और कार्यक्रमों के लिए आते थे, पर अब चीज़ें बदल चुकी हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि उनकी तबियत भी अब ठीक नहीं रहती है, और आर्थिक स्थिति भी सही नहीं है. उनकी देख-रेख आस-पास के लोग ही करते हैं.
राणाघाट के रहने वाले संतु साहा ने बताया, "वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया की काफ़ी भीड़ लगी रहती थी. दूर-दूर से लोग उनसे मिलने आते थे. अब देख-रेख करने वाला कोई नहीं है. अपने भी साथ नहीं हैं. वह अकेलेपन से जूझती हैं."
वह कहते हैं, "उनके घर की हालत भी बहुत ही ख़राब थी. हाल ही में यहां के एक शुभचिंतक ने उसकी मरम्मत करवाई है. उनके खाने-पीने से लेकर कपड़ों तक का ध्यान दूसरे लोग रखते हैं."
राणाघाट स्टेशन के पास एक दुकानदार बताते हैं कि इन दिनों यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स उन्हें तलाशते हुए आते हैं.
हम सुबह के क़रीब साढ़े दस बजे उनके घर पहुंचे. उस समय वह अपने में ही खोई हुई थीं.
हमने उनसे पुराने दिनों के बारे में पूछा, तो कहने लगीं, "मुझे वह पल आज भी याद है. वह गाना मैं आज भी गाती हूं. अगर आप सुनना चाहेंगी, तो मैं ज़रूर सुनाऊंगी."
फिर वह खुश होकर गाने लगीं, "एक प्यार का नगमा है."
वह अपने बीते हुए दिनों में डूब सी जाती हैं, वो कहती हैं, "2019 मेरे लिए बहुत लकी था. मेरा वीडियो वायरल होने के बाद एक नया मोड़ आया. बंगाल में मैंने कार्यक्रम किए, गाने गाए. फिर इसके बाद मुंबई गई."
वह कहती हैं कि उन्होंने कभी संगीत की तालीम हासिल नहीं की. रेडियो पर गाने सुन-सुनकर ही सीखा.
"मैंने कभी किसी से गाना नहीं सीखा. मेरे मौसाजी के पास एक रेडियो था. मौसी दोपहर में रेडियो चला देती थीं. मुझे नींद नहीं आती थी, तो मैं रेडियो पर गाने सुनती थी, कभी नाटक भी सुनती थी."
"जब भी गाना बजता था तो मैं ध्यान से सुनती थी. ऐसे थोड़ा-थोड़ा करके सीखने के बाद मुझे भी लगता था कि मैं भी गा सकती हूं. पर उत्साह बढ़ाने वाला कोई नहीं था."
हिंदी के पुराने गाने गाकर मशहूर होने वाली रानू मंडल ने बताया कि बचपन से ही उन्हें हिंदी गाने सुनना और फ़िल्में देखना पसंद था. आशा भोसले के निधन के विषय पर उन्होंने दुख जताते हुए कहा, "हां, मैंने सुना. टेलीविज़न से ख़बर मिली. अफ़सोस तो है. मैं उनका गाना सुनती थी. उनकी आवाज़ मुझे बहुत अच्छी लगती थी. उनके ज़माने में रफ़ी जी, मुकेश जी, किशोर कुमार-सबके गाने (सुनती थी)."
छोटी उम्र से ही संघर्ष शुरू
रानू मंडल ने बताया, "मुझे कभी स्कूल नहीं भेजा गया. मैं अपने छोटे भाई का ध्यान रखती थी. उसकी किताबें देखकर मैं सोचती थी कि मैं भी पढ़ूंगी. मैं हमेशा कोशिश करती थी."
उन्होंने बताया कि कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई थी, "मेरी शादी भी काफ़ी जल्दी हो गई थी, दो बच्चे भी थे. मेरे पति मुंबई में कुक का काम करते थे."
दोनों बच्चों का गुज़ारा करने के लिए उन्हें काफ़ी मेहनत करनी पड़ी. वह बताती हैं, "मैं पैदल चलकर बेकरी के सामान बेचने जाती थी. रिक्शे के भी पैसे नहीं होते थे. मैंने बहुत मेहनत की, यह सिर्फ़ ऊपर वाले को पता है."
वो कहती हैं कि तब भी संगीत ने ही उन्हें हौसला दिया.
रानू मंडल ने बताया, "मैं तब भी गाना गाती थी- चाहे घर का काम करते-करते या रात को घर आकर, मैं हमेशा गाना गाती थी."
रानू मंडल की निजी ज़िंदगी काफ़ी उतार-चढ़ाव से गुज़री. वह मुंबई से पश्चिम बंगाल वापस आ गईं. उस समय पारिवारिक जीवन मुश्किल दौर से गुजर रहा था. आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी.
"मैं चर्च में जाती थी. जितनी भी शिकायतें थीं, मैं उन्हीं (ईश्वर से) के पास जाकर करती थी. कहती थी कि तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया. कभी रो-रोकर, कभी झगड़ा करके."
वह कहती हैं, "मैंने कभी अपने परिवार से ज़्यादा कुछ नहीं सोचा. मैं जो गाने गाती थी, वह अपने दुःख भुलाने के लिए गाती थी."
स्टेशन पर कैसे गाने लगीं?
वह बताती हैं कि यही कोई साल 2014–15 की बात रही होगी. वह उन दिनों अक्सर राणाघाट रेलवे स्टेशन पर जाती थीं.
उन्होंने बताया, "मैं उस समय स्टेशन पर जाती थी. जो लोग मुझे जानते थे, वे अक्सर गाना गाने के लिए कहते थे. गाना सुनकर कोई बिस्किट खिलाता था, कोई दस–बीस रुपये दे देता था. ऐसे करते-करते लोगों से जान-पहचान हो गई थी."
2019 में एक स्थानीय युवक ने उनका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया. वह वीडियो वायरल हो गया और इंटरनेट पर लोग उन्हें सर्च करने लगे. उस अनुभव के बारे में वह बताती हैं कि उस दिन वह किसी आम दिन की तरह घर के काम में व्यस्त थीं, तभी किसी ने आकर उन्हें वीडियो के बारे में बताया.
उन्होंने कहा, "मुझे कुछ पता नहीं था कि वायरल होना क्या होता है और यह कि मैं वायरल हो गई हूं."
उन दिनों मीडिया में उनकी काफ़ी चर्चा हुई. उनके पास स्टेज शो और उद्घाटन समारोहों के लिए आमंत्रण आने लगे. उन्होंने बांग्ला में गाने भी गाए. फिर मुंबई में एक रियलिटी शो के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया, जहां उनकी मुलाकात हिमेश रेशमिया से हुई.
रानू मंडल कहती हैं, "मुझे जब पता चला कि मैं मुंबई जाऊंगी तो मैं बहुत खुश हो गई. मैं जब स्टूडियो में गई, तब रेशमिया जी मेकअप कर रहे थे. मैं मन ही मन सोच रही थी कि मैं यहां किसी को नहीं जानती, मैं नहीं गाऊंगी."
"फिर मैंने सुना कि स्टेज पर मेरा नाम पुकारा जा रहा है, तो मैं गई. मैंने वही गाना गाया क्योंकि हिमेश जी को शक था कि क्या मैं वही हूं. जब मैंने फ़िल्म का वह गाना गाया, तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए. फिर उन्होंने मुझे स्टेज पर एक गाना सिखाया और मैंने गाया."
फिर उन्होंने हिमेश रेशमिया के साथ भी एक गाना गाया. हिमेश रेशमिया की फिल्म 'हैप्पी हार्डी एंड हीर' में रानू मंडल ने गाना भी गाया. उस वक्त उनके पास कई प्रोजेक्ट्स थे. उन पलों को आज भी रानू मंडल याद करती हैं.
परिवार के साथ न रहने का दुख
इसके बाद भी कई बार रानू मंडल ख़बरों में रहीं, लेकिन गानों की वजह से नहीं बल्कि विवादों के कारण. उन पर सार्वजनिक मंचों पर आपा खोने का आरोप भी लगा. जिस व्यक्ति के वीडियो से वह वायरल हुई थीं, उन पर भी उन्होंने बाद में आरोप लगाए और पारिवारिक विवाद की भी चर्चा रही. और फिर वह लोगों के सर्च से ही नहीं उनकी याददाश्त से भी बाहर जाने लगीं.
आपा खोने वाले विवाद पर वह कहती हैं, "मैं अपने परिवार से मिल नहीं पाती थी, दिल में बहुत दर्द था. लेकिन फिर भी मैं सबके सामने दिखती थी कि मैं खुश हूं."
रानू मंडल के परिवार के लोग उनके साथ नहीं रहते हैं. वह अब कैसी हैं?
उनकी एक पड़ोसन बताती हैं, "कुछ महीने पहले उनका घर रहने के काबिल भी नहीं था. उनकी हालत ऐसी नहीं थी कि वह उसे साफ कर सकें या अपना ख्याल रख सकें."
इन दिनों मिठू सरकार उनकी देखभाल कर रही हैं. उनका कहना है, "वह यहां अकेली रहती हैं. चर्च के एक दादा हैं, जिन्होंने मुझे रानूजी की देखभाल करने का काम सौंपा है. कुछ महीने पहले उनकी तबियत काफ़ी खराब हो गई थी. तब से मैं उनकी देखभाल कर रही हूं. पिछले कुछ वर्षों में उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति दोनों ही बिगड़ गई है."
एक वक्त पर सुर्खियों में रहने वाली रानू मंडल अब लाइमलाइट से दूर कैसा महसूस कर रही हैं, यह पूछने पर उन्होंने जवाब दिया, "अब भी थोड़े-बहुत लोग आते हैं. जब लोग आते हैं तो आते हैं, जब नहीं आते तो कोई भी नहीं आता."
जब रानू मंडल से पूछा गया कि उनके पास अब कोई शो नहीं हैं, इसका उन्हें अफ़सोस है या नहीं?
तो उन्होंने कहा, "पहले-पहले मैं इस बारे में सोचती थी, लेकिन अब नहीं सोचती हूं."
हालांकि, परिवार से दूर रहने का ग़म उन्हें अब भी सताता है. वह कहती हैं, "मेरे बच्चे मुझसे बिछड़ गए. मुझे इसका दर्द है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (bbc.com/hindi)


