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मुंबई, 28 अप्रैल। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक 9 साल पुराने मानहानि मामले को 2046 तक के लिए स्थगित कर दिया है। न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने इस फैसले में साफ कहा कि यह दो बुजुर्गों के बीच अहंकार की लड़ाई है, जिसकी वजह से कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है।
मामला मुंबई के मलबार हिल स्थित श्याम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी से जुड़ा है। 90 वर्षीय गुजराती लेखिका तारिणीबेन देसाई और उनकी बेटी ध्वनि देसाई ने 2017 में सोसाइटी के कुछ सदस्यों के खिलाफ 20 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया था। सोसाइटी ने 2015 में इन दोनों महिलाओं को सोसाइटी से निकालने का प्रस्ताव पास किया था, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया था।
न्यायमूर्ति जैन ने अपने एक पेज के आदेश में लिखा कि यह उन मामलों में से एक है जिसमें जीवन के अंतिम पड़ाव पर पार्टियों के बीच अहंकार की लड़ाई कोर्ट सिस्टम को जाम कर रही है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस मामले को 2046 के बाद सूचीबद्ध किया जाए और किसी भी स्थिति में इसे सीनियर सिटीजन होने के आधार पर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की थी। एक बार सोसाइटी को बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया, लेकिन तारिणीबेन देसाई माफी स्वीकार करने को तैयार नहीं हुईं। 27 मार्च 2025 को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो न तो महिलाएं और न ही उनके वकील कोर्ट में पहुंचे।
यह फैसला कोर्ट की बढ़ती खीझ को दर्शाता है, जहां छोटे-मोटे व्यक्तिगत झगड़ों में सालों-साल तक समय बर्बाद होता रहता है, जबकि हत्या, बलात्कार और अन्य गंभीर मामलों की सुनवाई लंबित पड़ी रहती है।
(Bar and Bench, LiveLaw, Hindustan Times, The Print, The Indian Express)


