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देहरादून, 22 अप्रैल। सर्दियों में छह माह बंद रहने के बाद बुधवार को सुबह पूरे विधि विधान के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए फिर खोल दिए गए जहां पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से की गयी ।
ग्यारह हजार फुट से अधिक की उंचाई पर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के कपाट विशेष पूजा अर्चना के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सुबह आठ बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पत्नी गीता के साथ इस मौके पर उपस्थित थे ।
मंदिर के कपाट खोले जाने की प्रक्रिया सुबह पांच बजे शुरू हुई । इसके बाद, मंदिर के रावल (मुख्य पुजारी) भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर, मुख्यमंत्री धामी, केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल, पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती सहित अन्य धर्माचार्यों एवं वेदपाठियों ने गर्भगृह में प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना की और ठीक आठ बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए ।
सुहावने मौसम में मंदिर प्रांगण में मौजूद हजारों श्रद्धालु कपाट खुलने के अवसर के साक्षी बने । कपाट खुलने के मौके पर सिख रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों से पूरा वातावरण अलौकिक हो उठा और अपार उत्साह से भरे श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’, 'हर हर महादेव' और ‘जय बाबा केदार’ के जयकारे लगाते नजर आए ।
इस मौके पर भगवान शिव के धाम को विभिन्न प्रकार के 51 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था जहां अत्यंत मोहक रूप से 'सांब सदाशिव' लिखा हुआ था । कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई ।
धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से की गयी ।
मुख्यमंत्री ने बाबा केदार की पूजा कर प्रदेश और देश में सुख—समृद्धि एवं शांति की कामना की ।
धामी ने इस मौके पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा कहा कि केदारनाथ धाम न केवल सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है ।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा हर वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और इस वर्ष भी बाबा केदार के आशीर्वाद से यह यात्रा ऐतिहासिक होगी।
उन्नीस अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले गए थे । उत्तराखंड के चार धामों में शामिल बदरीनाथ धाम के कपाट बृहस्पतिवार को खुलेंगे और इसी के साथ इस वर्ष की चारधाम यात्रा की पूरे तरीके से विधिवत शुरूआत हो जाएगी ।
हर साल सर्दियों में भीषण ठंड के कारण चारों धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं ।
छह माह के यात्रा सीजन के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इन धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं । पिछले साल 51 लाख से अधिक श्रद्धालु हिमालयी धामों में पहुंचे ।
इस बार पहली बार चारधामों में से तीन धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगायी गयी है जिन्हें मंदिरों में प्रवेश करने के लिए शर्त का पालन करना होगा ।
बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने जहां बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसरों में गैर सनातनियों को प्रवेश के लिए सनातन के प्रति अपनी आस्था के बारे में हलफनामा देना अनिवार्य किया है वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने घोषणा की है कि गैर सनातनियों को पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) पीने के बाद ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी ।
हालांकि, यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रूख अपनाते हुए देवी यमुना के दर्शन के लिए आने वाले हर श्रद्धालु का बिना जाति—धर्म पूछे स्वागत करने का निर्णय लिया है। (भाषा)


