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हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अन्य दंड व जुर्माना यथावत रखा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने चर्चित एर्राबोर पोटाकेबिन आश्रम दुष्कर्म प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए आरोपी की सजा में आंशिक संशोधन किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने मृत्यु तक कठोर कारावास’ को घटाकर 20 वर्ष का कठोर कारावास कर दिया, जबकि दोषसिद्धि, अन्य सजाएं और जुर्माना यथावत रखा गया।
मालूम हो कि 24 जुलाई 2023 को पीड़िता की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी 6 वर्ष 10 माह की बेटी एर्राबोर स्थित पोटाकेबिन आश्रम में रहती थी। 22 जुलाई की रात बच्ची अपने कमरे से लापता हो गई। बाद में मिलने पर उसने दर्द की शिकायत करते हुए बताया कि एक व्यक्ति उसे दूसरे कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता व आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया। जांच के बाद आरोपी माड़वी हिड़मा उर्फ सोनू उर्फ राजू (35) को 27 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया गया। गवाहों के बयान और पहचान परेड के बाद ट्रायल कोर्ट में आरोपपत्र पेश किया गया।
निचली अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट की धारा 6 के तहत मृत्यु तक आजीवन कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना सुनाया था। इसके अलावा आईपीसी की धारा 450, 363, 366 और 324 के तहत अलग-अलग सजा और जुर्माने भी तय किए गए थे, जिन्हें साथ-साथ चलाने का आदेश दिया गया था।
हाईकोर्ट ने सजा की अवधि में राहत देते हुए इसे 20 वर्ष तक सीमित किया, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषसिद्धि और अन्य दंडों में कोई बदलाव नहीं किया।


