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यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत ने हंगरी में लागू किए गए एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून को यूरोपीय संघ के नियमों का उल्लंघन करार दिया है. ब्रसेल्स ने यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस के इस फैसले को एक ऐतिहासिक जीत कहा.
यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ के 27 में से 16 सदस्य देशों और यूरोपीय संसद ने इस कानून को लेकर हंगरी को यूरोपीय न्यायालय में चुनौती दी थी. हंगरी का यह कानून मूल रूप से बाल यौन शोषण के मामलों में सजा सख्त करने के लिए लाया गया था. लेकिन 2021 में धुर दक्षिणपंथी विक्टर ओरबान की सत्तारूढ गठबंधन सरकार ने इसमें संशोधन कर 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के लिए समलैंगिकता के प्रचार पर रोक लगा दी थी. इसी कानून के आधार पर 2025 में हंगरी ने प्राइड मार्च निकालने पर रोक लगाई थी.
12 अप्रैल 2026 के चुनावों में ओरबान को हराने वाले नव निर्वाचित नेता पेटर मॉजार ने यूरोपीय संघ के साथ हंगरी के संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने का वादा किया है. वे करीब 18 अरब यूरो की उस राशि को जारी कराने के प्रयास में हैं, जिसे ब्रसेल्स ने ओरबान के कार्यकाल के दौरान रोक दिया था. यह रोक आंशिक रूप से एलजीबीटीक्यू कानून को लेकर ही लगाई गई थी.
कैसे यूरोपीय संघ और हंगरी के टकराव का कारण बना ये कानून
2021 में लागू किए गए इस कानून ने यूरोपीय संघ के कई देशों में कार्यकर्ताओं और सरकारों को नाराज किया. उनका कहना था कि यह कानून एलजीबीटीक्यू समुदाय को कलंकित करता है और समलैंगिक संबंधों को बाल यौन शोषण जैसा ठहराता है.
मंगलवार को यूरोपीय न्यायालय ने कहा कि हंगरी ने यूरोपीय संघ के कानून का कई अलग अलग स्तरों पर उल्लंघन किया है. अदालत ने यह भी पाया कि इस कानून के मामले में यूरोपीय संघ संधि के अनुच्छेद दो का उल्लंघन हुआ है. इसमें ट्रांसजेंडर और गैर परंपरागत यौन पहचान रखने वाले लोगों के अधिकारों के साथ साथ मानवीय गरिमा, समानता और मानवाधिकारों के सम्मान जैसे मूल्यों के उल्लंघन की बात कही गई है. इसमें अल्पसंख्यकों के अधिकार भी शामिल हैं.
अदालत ने यह भी कहा कि हंगरी इस तरह के कानून को सही ठहराने के लिए अपनी राष्ट्रीय पहचान का हवाला नहीं दे सकता, क्योंकि यह यूरोपीय संघ की मूल भावना से जुड़े मूल्यों का उल्लंघन करता है.
मानवाधिकार संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
हंगरी के मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है. ब्रसेल्स में यूरोपीय आयोग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मील का पत्थर करार दिया और कहा कि अब इस पर अमल करना हंगरी सरकार की जिम्मेदारी है.
यूरोपीय संघ समर्थक रूढ़िवादी नेता पेटर मॉजार ने एक हफ्ते पहले हुए चुनावों में 16 साल तक सत्ता में रहे विक्टर ओरबान को हरा दिया. मॉजार समानता का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन अब तक वह भी खुलकर एलजीबीटीक्यू अधिकारों का समर्थन करने से बचते रहे हैं.
हालांकि, अपनी जीत के भाषण में उन्होंने कहा कि हंगरी ने यह फैसला किया है कि वह ऐसा देश बनना चाहता है, जहां किसी को भी अलग तरह से या बहुसंख्यक समाज से अलग ढंग से प्रेम करने के लिए कलंकित न किया जाए.
इस कानून को रद्द करने का जिम्मा हंगरी की नई संसद पर होगा जो मई की शुरुआत में शपथ लेने जा रही है.


